रुद्रप्रयाग, 22 जून 2026
उत्तराखंड के पहाड़ी अंचल से एक बेहद संवेदनशील खबर सामने आ रही है। श्री हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर स्थित रुद्रप्रयाग जिले के नागरासू गुरुद्वारे में पिछले दो दिनों से भारी तनाव का माहौल बना हुआ है। हथियारों से लैस निहंग सिखों के एक गुट ने गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल और छत पर कब्ज़ा जमा लिया, जिसके बाद प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, पीएसी (PAC) और आईटीबीपी (ITBP) की टुकड़ियों को तैनात किया गया है, और अफवाहों को रोकने के लिए रुद्रप्रयाग, संस्कृति नगरी श्रीनगर और कर्णप्रयाग जैसे संवेदनशील इलाकों में एहतियातन इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि यह पूरा विवाद आखिर क्या है, इसके पीछे की वजह (क्यों) क्या है और इस समय धरातल पर ताजा स्थिति क्या बनी हुई है।
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| विवाद की तस्वीर: रुद्रप्रयाग के नागरासू गुरुद्वारे (दमदमा साहिब) की छत पर पारंपरिक हथियारों के साथ मोर्चा संभाले निहंग सिख। इसी गतिरोध के बाद प्रशासन ने इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं। |
क्या है पूरा मामला? (The Incident)
घटना शनिवार (20 जून) दोपहर की है, जब पंजाब के मोहाली से आए निहंग सिखों का एक जत्था बद्रीनाथ हाईवे पर स्थित नागरासू के गुरुद्वारा दमदमा साहिब पहुंचा। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अनुसार, इन निहंगों ने वहां आते ही प्रदर्शनकारियों के ठहरने के लिए 50 से 60 कमरों की मांग की।
जब प्रबंधन ने इतनी बड़ी संख्या में तुरंत कमरे उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई, तो बात बिगड़ गई। आरोप है कि इसके बाद निहंगों ने सेवादारों के साथ गाली-गलौज, मारपीट और गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। देखते ही देखते करीब 7 से 8 निहंग सिख पारंपरिक धारदार हथियारों (तलवार, भाले, कुल्हाड़ी) के साथ गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। उन्होंने तीसरी मंजिल के दरवाजों को अंदर से बंद कर लिया और वहां मौजूद एक सेवादार/बुजुर्ग श्रद्धालु को बंधक बना लिया।
विवाद की असली वजह क्या है? (Why is this happening?)
नागरासू गुरुद्वारे में हुआ यह हंगामा कोई अचानक उपजा विवाद नहीं है, बल्कि इसके तार कुछ दिन पुरानी एक अन्य घटना से जुड़े हैं:
- 16 जून का कर्णप्रयाग विवाद: दरअसल, 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग बाजार में हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे कुछ निहंग श्रद्धालुओं का एक होटल के पास गाड़ी पार्क करने को लेकर स्थानीय व्यापारियों से विवाद हो गया था।
- तलवारबाजी और गिरफ्तारियां: वह मामूली कहासुनी इतनी बढ़ गई कि निहंगों ने कथित तौर पर तलवारों से हमला कर दिया, जिसमें 4 स्थानीय लोग घायल हो गए। इसके बाद चमोली पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए मोहाली (पंजाब) के 4 निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
- एकतरफा कार्रवाई का आरोप: नागरासू में हंगामा कर रहे निहंगों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में 'एकतरफा कार्रवाई' की है। उनकी मांग है कि जेल में बंद उनके चारों साथियों को तुरंत रिहा किया जाए, चमोली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को रद्द किया जाए और कर्णप्रयाग विवाद में शामिल स्थानीय लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
चूंकि नागरासू गुरुद्वारा प्रबंधन ने इस 'एकतरफा कार्रवाई' के विरोध में निहंगों के प्रस्तावित धरने का समर्थन नहीं किया, इसलिए निहंगों ने गुरुद्वारे के भीतर ही मोर्चा खोल दिया।
प्रशासन का रुख और ताजा स्थिति क्या है?
घटना की सूचना मिलते ही रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी (DM) विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक (SP) नीहारिका तोमर भारी सुरक्षा बल के साथ मौके पर पहुंचे। गढ़वाल कमिश्नर और आईजी राजीव स्वरूप भी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
ताजा अपडेट: घंटों चली लंबी और मैराथन बातचीत के बाद प्रशासन को बड़ी कामयाबी मिली है। रविवार देर शाम तक निहंगों ने बंधक बनाए गए सेवादार को सुरक्षित रिहा कर दिया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गुरुद्वारे के भीतर लंगर सेवा और आम श्रद्धालुओं के लिए अरदास सामान्य रूप से चल रही है। चारधाम यात्रा पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। हालांकि, किसी भी अप्रिय घटना या सांप्रदायिक तनाव को टालने के लिए इलाके में धारा 163 (BNSS) लागू कर दी गई है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं।
उत्तराखंड सरकार के गृह सचिव शैलेश बगौली ने गढ़वाल आईजी को पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा है कि इस विवाद को किसी भी तरह का धार्मिक या सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

