काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple Uttarkashi) उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यह मंदिर भागीरथी नदी के किनारे स्थित है और यहाँ आने वाले श्रद्धालु भगवान् शिव की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी में दर्शन करने से श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और धार्मिक आस्था की अनुभूति होती है। इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यधिक है, जो उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को आकर्षित करता है।
📅 अंतिम सत्यापन: इस लेख में दी गई जानकारी हमारी टीम द्वारा मार्च 2026 में सत्यापित की गई है। यात्रा से पहले मंदिर के समय की पुष्टि अवश्य करें।
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी (Kashi Vishwanath Temple Uttarkashi)
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी में सबसे पुराने और सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है, जो कि भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। यह भौगोलिक क्षेत्र आसपास के पहाड़ों के साथ भागीरथी नदी का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। इसकी लोकप्रियता के कारण यह चार धाम यात्रा मार्गों का हिस्सा है, और तीर्थ यात्री दर्शनाभिलाषी भी होते हैं।
- समर्पित: भगवान शिव (शिवलिंग रूप)
- स्थान: भागीरथी नदी तट, उत्तरकाशी, उत्तराखंड
- निर्माण वर्ष: 1857 ई. (पुनर्निर्माण)
- शिवलिंग ऊंचाई: 56 सेमी, दक्षिण दिशा में झुकाव
- निकटतम रेलवे स्टेशन: ऋषिकेश / देहरादून (~167 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा: जॉली ग्रांट, देहरादून (~171 किमी)
- प्रवेश शुल्क: निःशुल्क
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Kashi Vishwanath Temple Uttarkashi Guide (काशी विश्वनाथ मंदिर यात्रा गाइड)
उत्तरकाशी शहर के मुख्यालय में स्थित यह मंदिर, गंगोत्री जाने वाले यात्रियों के लिए एक तीर्थस्थल है। मंदिर के प्रवेश द्वार के पास पूजा सामग्री बेचने वाली कई दुकानें हैं। तो अगर आप अपने साथ कोई भी पूजा का सामान नहीं लायें हैं तो भी आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
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आप आसानी से ताजे फूल और पूजा से संबंधित सामान मामूली कीमतों पर प्राप्त कर सकते हैं। यह उत्तरकाशी का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है और अगर आपको उत्तरकाशी या गंगोत्री की यात्रा करनी है तो इसे कदापि छोड़ नहीं सकते।
🕐 दर्शन समय (Darshan Timings)
| समय / Session | समय / Timing |
|---|---|
| प्रातःकालीन दर्शन (Morning) | 6:00 AM – 12:00 PM |
| मध्याह्न विराम (Afternoon Break) | 12:00 PM – 3:00 PM |
| सायंकालीन दर्शन (Evening) | 3:00 PM – 9:00 PM |
| श्रावण मास / विशेष पर्व | विस्तारित समय — पहले से पुष्टि करें |
⚠️ समय परिवर्तनशील हो सकते हैं। यात्रा से पहले स्थानीय मंदिर समिति या Uttarakhand Tourism से पुष्टि करें।
- सुबह 6–8 बजे के बीच पहुंचें — भीड़ कम होती है और वातावरण शांत रहता है।
- श्रावण मास के सोमवार को विशेष भीड़ होती है; उस समय अतिरिक्त समय रखें।
- मंदिर परिसर में मोबाइल फोटोग्राफी प्रतिबंधित हो सकती है — प्रवेश से पहले जाँचें।
- पूजा सामग्री मंदिर द्वार के पास ₹20–₹100 में उपलब्ध है।
- पार्किंग मुख्य बाजार के पास उपलब्ध है; मंदिर परिसर में वाहन नहीं जाते।
काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तरकाशी का इतिहास (History)
काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और कहा जाता है कि इसे शुरू में भगवान परशुराम ने बनाया था और जिसे बाद में 1857 में सुदर्शन शाह की पत्नी महारानी श्रीमती खनेती द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण पहले से मौजूद प्राचीन वेदी पर पारंपरिक हिमालयी मंदिर वास्तुकला के साथ 1857 ई. किया गया था। यह वास्तुकला शैली उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की पहचान है, जिसमें पत्थर और लकड़ी का उपयोग विशिष्ट ढंग से किया जाता है।
किंवदंती है कि भगवान शिव इसे कलियुग के दूसरे निवास स्थान के रूप में मानते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब काशी या वाराणसी पानी के नीचे डूब जाएगी तब भगवान काशी विश्वनाथ को उत्तरकाशी के इस मंदिर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
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ऐसा भी माना जाता है कि ऋषि मार्कंडेय को जब सोलहवां साल आरम्भ हुआ तो उनके माता-पिता उदास रहने लगे। पुत्र ने कई बार उनसे उनकी उदासी का कारण जानने का प्रयास किया। एक दिन महर्षि मार्कण्डेय ने बहुत जिद की तो उनके पिता महामुनि मृकण्डु ने बताया कि भगवान शंकर ने तुम्हें मात्र सोलह वर्ष की आयु दी है और यह आयु पूर्ण होने वाली है। इस कारण मुझे शोक हो रहा है।
इतना सुन कर ऋषि मार्कण्डेय ने अपने पिता जी से कहा कि आप चिंता न करें। मैं भगवान शंकर जी को मना लूँगा और अपनी मृत्यु को टाल दूंगा। इसके बाद वे घर से दूर एक जंगल में चले गए। वहां एक शिवलिंग स्थापना करके वे विधिपूर्वक पूजा अर्चना करने लगे। निश्चित समय आने पर काल पहुंचा।
महर्षि ने उनसे यह कहते हुए कुछ समय माँगा कि अभी वह शंकर जी की स्तुति कर रहे हैं। जब तक वह पूरी कर नहीं लेते तब तक प्रतीक्षा करें। काल ने ऐसा करने से मना कर दिया तो मार्कण्डेय ऋषि जी ने विरोध किया। काल ने जब उन्हें ग्रसना चाहा तो वे शिवलिंग से लिपट गए। इस सब के बीच भगवान् शिव वहां प्रकट हुए। उन्होंने काल की छाती में लात मारी। उसके बाद मृत्यु देवता शिवजी की आज्ञा पाकर वहां से चले गए।
इसी कारण काशी विश्वनाथ मंदिर के शिवलिंग का कुछ झुकाव (अपनी धुरी पर एक तरफ से झुका हुआ) देखा जा सकता है।
Inside Kashi Vishwanath Temple (काशी विश्वनाथ मंदिर के अंदर)
भगवान शिव यहाँ शिवलिंग के रूप में प्रकट हैं, जो पूरी मानवता के लिए उनके आशीर्वाद की वर्षा करते हुए गहन ध्यान में डूबे हुए हैं। यहां का शिवलिंगम 56 सेमी ऊंचाई का है और दक्षिण की ओर झुकाव है।
गर्भगृह में, देवी पार्वती और भगवान गणेश भी हैं। नंदी मंदिर के बाहरी कक्ष में है। साक्षी गोपाल और ऋषि मार्कण्डेय की छवि को ध्यान में यहां दर्शाया गया है।
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी स्थान
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी के मुख्य बाजार के पास स्थित है। मंदिर भागीरथी नदी के तट से कुछ मीटर की दूरी पर, एनएच 34 के पास, गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज और गवर्नमेंट इंटर कॉलेज के निकट है।
🚗 कैसे पहुंचें (How to Reach)
| माध्यम | विवरण | दूरी |
|---|---|---|
| ✈️ हवाई मार्ग | जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून → टैक्सी द्वारा उत्तरकाशी | ~171 किमी (मसूरी रोड) |
| 🚂 रेल मार्ग | ऋषिकेश / देहरादून रेलवे स्टेशन → बस या टैक्सी | ~167 किमी |
| 🚌 सड़क मार्ग | ऋषिकेश/देहरादून से GMOU बस या शेयर टैक्सी उपलब्ध | NH-34 द्वारा |
काशी विश्वनाथ मंदिर जाने का रास्ता — Google Map Location
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी के निकट होटल (Nearby Hotels)
यद्यपि मंदिर परिसर शहर के केंद्र में स्थित है, किन्तु इसके निकटतम कोई होटल उपलब्ध नहीं है, तथापि मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित होटल्स और आश्रम नीचे दिए गये हैं।
Hotels (होटल्स)
- GMVN Tourist Rest House
- Hotel KNB Heritage
- Bhandari Annexe
- Shivling Resort
- Monal Tourist Lodge
- Hotel Prosperity & Restaurant
Ashrams (आश्रम)
- Kailash Ashram
- Prahalad Ashram
- Adi Shankara Brahma Vidya Peeth
- Rudravas Ashram
- Yoga Vidya Gurukulam Uttarkashi Himalaya
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