उत्तराखंड में कोरोना : मौत की सूचना न देने वाले अस्पतालों के सीएमएस व एमएस पर दर्ज होगा केस, एक को नोटिस

कोरोना संक्रमित मरीजों की मौतें छिपाने वाले अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) और चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।


 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौतें छिपाने वाले अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) और चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। मौतें छिपाने के मामले में उत्तराखंड सरकार ने सख्त फैसला लिया है। शनिवार को सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। 



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प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौतें लगातार बढ़ रही है। वहीं, निजी अस्पताल मरीजों की मौतें छिपा रहे हैं। हरिद्वार में बाबा बर्फानी हास्पिटल में 65 कोरोना मरीजों की मौत का खुलासा होने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इस मामले मे राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाबा बर्फानी अस्पताल को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है। हरिद्वार के सीएमओ का कहना है कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। 


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वहीं, कई छोटे अस्पतालों में एक ही दिन में कई मरीजों की मौतें दिखाई जा रही हैं। जिससे जाहिर है कि अस्पतालों की ओर से समय पर मरीजों की मौत की सूचना राज्य कोविड कंट्रोल रूम को नहीं दी जा रही है। 

24 घंटे के भीतर ई-मेल से राज्य कोविड कंट्रोल रूम को सूचित करें

सरकार की ओर से पूर्व भी कोविड इलाज कर रहे अस्पतालों को निर्देश दिए गए थे कि संक्रमित मरीज की मौत होने पर 24 घंटे के भीतर ई-मेल से राज्य कोविड कंट्रोल रूम को सूचित करें। जिससे प्रदेश में होने वाले मौतों का सही आंकड़ा सामने आ सके।


इसके बावजूद भी अस्पतालों की ओर से मरीजों की मौत छिपाई जा रही है। हरिद्वार के बाबा बर्फानी अस्पताल में 25 अप्रैल से 12 मई तक 65 कोरोना मरीजों की मौतें हुई थी। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी। 


सचिव स्वास्थ्य की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को आदेश दिए कि कोरोना संक्रमित मरीज की मौत की सूचना (डेथ आडिट) न देने वाले अस्पतालों के सीएमएस और एमएस के खिलाफ कोविड महामारी एक्ट और आईपीसी 1860 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

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