ताज़दार-ए-हरम का अर्थ क्या है?

ताजदार-ए-हरम: मूल रूप से फ़ारसी का एक वाक्यांश है लेकिन आमतौर पर मुसलमानों द्वारा आमतौर पर कविता/गीतों में उपयोग किया जाता है।

ताज़दार-ए-हरम का अर्थ क्या है?
चित्र : प्रतीकात्मक | स्त्रोत: गाना 


यह मूल रूप से फ़ारसी का एक वाक्यांश है लेकिन आमतौर पर मुसलमानों द्वारा उपमहाद्वीप में, आमतौर पर कविता और / या गीतों में उपयोग किया जाता है।

تاجدار - ताजदार - फ़ारसी शब्द "تاج" से बना है, जिसका अर्थ मुकुट है, और प्रत्यय "دار" जिसका अर्थ है धारण करने वाला। प्रत्यक्ष अनुवाद राजा, या शाब्दिक है, "जो मुकुट धारण करता है"

حرم - हरम - इस शब्द का अर्थ है "अभयारण्य" और इस्लाम में दो पवित्र स्थलों - मक्का और मदीना को संदर्भित करता है।

ताजदार-ए-हरम पैगंबर मुहम्मद को समर्पित एक गीत का शीर्षक है। ऐसे गीतों को "नात" कहा जाता है

ताज - मुकुट

दार- जो धारण करता है (क्राउन)

ए- का

हरम - पवित्र स्थान (मदीना)

सीधे शब्दों में कहें, "पवित्र स्थानों के राजा"

"ताजदार-ए-हरम" पाकिस्तान के स्वर्गीय साबरी ब्रदर्स, गुलाम फरीद साबरी (1930-1994) और मकबूल अहमद साबरी (1945-2011) द्वारा सबसे चर्चित कव्वाली है। 1947 के विभाजन के बाद भारत वे इलाहाबाद से पाकिस्तान चले गए, प्रहलाद उर्दू इलाहाबादी (2009), एक प्रखर उर्दू कवि थे। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि साबरी ब्रदर्स द्वारा लंबे संस्करण जो यहां अनुवादित हैं, उनमें कई लेखकों से कई भाषाओं में कई दिलचस्प तत्व शामिल हैं।


यह कव्वाली नात (पैगंबर मुहम्मद की प्रशंसा) की श्रेणी में आती है, क्योंकि यह मुहम्मद के जरूरतमंदों पर दया करने के लिए एक दलील के रूप में कार्य करता है। सबरी ब्रदर्स द्वारा शांतचित्त कुछ नट के अंशों को सुनाया जाता है।

ताज़दार-ए-हरम गाने के हिंदी बोल (लिरिक्स)

क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे
डूबे ना कभी मेरा सफ़ीना लिख दे
जन्नत भी गँवारा है
मगर मेरे लिए
ऐ कातिब-ए-तक़दीर
मदीना लिख दे

ताजदार-ए-हरम (2)

हो निगाह-ए-करम
हम गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे

हामी-ए बेकसां क्या कहेगा जहां
आपके दर से खाली अगर जाएँगे

ताजदार-ए-हरम (2)

कोई अपना नहीं गम के मारे हैं हम
आपके दर पे फ़रियाद लाएँ हैं हम
हो निगाह-ए-करम
वरना चौखट पे हम
आपका नाम ले ले के मर जाएँगे

ताजदार-ए-हरम (2)

क्या तुमसे कहूँ ऐ अ रब के कुँवर
तुम जानते हो मन की बतियाँ
दार-ए-फुरक़त तो आये उम्मी-लक़ब
काटे ना कटती हैं अब रतियाँ
तोरी प्रीत में सुध-बुध सब बिसरी
कब तक रहेगी ये बेखबरी
गाहे बेफ़िगन दुज़दीदाह नज़र

कभी सुन भी तो लो हमारी बतियाँ
आपके दर से कोई ना खाली गया
अपने दामन को भर के सवाली गया

हो हबीब-ए-हज़ीन(2)

पर भी आक़ा नज़र
वरना औराक़ ए-हस्ती बिखर जाएँगे

ताजदार-ए-हरम (2)

मैकशों आओ आओ.. मदीने चलें

आओ मदीने चलें (2)

इसी महीने चलें
आओ मदीने चलें

तजल्लियों की अजब है फ़िज़ा मदीने में
निगाहें शौक़ की हैं इंतेहां मदीने में
ग़म-ए-हयात ना खौफ-ए-क़ज़ा मदीने में
नमाज़-ए-इश्क़ करेंगे अदा मदीने में
बराह-ए-रास है राह-ए-खुदा मदीने में

आओ मदीने चलें (2)

इसी महीने चलें
आओ मदीने चलें

मैकशों आओ आओ मदीने चलें
दस्त-ए-साक़ी ये कौसर से पीने चलें
याद रखो अगर
उठ गई इक नज़र
जितने खाली हैं सब जाम भर जाएँगे
वो नज़र

ताजदार-ए-हरम (2)

खौफ़-ए-तूफ़ान है
बिजलियों का है डर
सख़्त मुश्किल है आक़ा किधर जाएँ हम
आप ही गर न लेंगे हमारी खबर
हम मुसीबत के मारे किधर जाएँगे

ताजदार-ए-हरम (2)

या मुस्तफ़ा
या मुजतबा
इरहम लना
इरहम लना
दस्त-ए हमह बेचारा-रा
दमाँ तो-ई दमाँ तो-ई
मन आसियां मन आजिज़म
मन बे-कसम हाल-ए-मेरा

पुरसं तो-ई (2)

ऐ मुश्क-बेद ज़ुम्बर फ़िशां
पैक-ए-नसीम ए सुबह दम
ऐ चारहगर ईसा नफ़स
ऐ मूनस ए बीमार-ए-ग़म
ऐ क़ासिद ए फुरकंदपह
तुझको उसी गुल की कसम
इन नलती या री अस-सबा
यौमन इला अर्द इल-हरम
बल्लिघ सलामी रौदतन
फी अन-नबी अल मोहतरम

ताजदार-ए-हरम (2)


1 टिप्पणी

  1. A very nice song. I like the tajdar-e-haram song
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