देहरादून में पीजी मेडिकल छात्रा डॉ. तन्वी की कार में आत्महत्या: HOD पर उत्पीड़न का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया मामला

Mandeep Singh Sajwan

देहरादून, 27 मार्च 2026 | उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (SGRR मेडिकल कॉलेज), पटेलनगर में नेत्र रोग (ऑप्थैल्मोलॉजी) विभाग में एमएस की तीसरी वर्ष की छात्रा डॉ. तन्वी (25-26 वर्ष) ने 24 मार्च 2026 की रात अपनी कार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस की प्रारंभिक जांच में संदेह है कि उन्होंने पोटैशियम क्लोराइड (KCl) का घातक इंजेक्शन खुद को लगाया। घटनास्थल पर एक खाली 100 मिलीलीटर की बोतल और हाथ में लगा कैनुला मिला, जो एक IV ड्रिप सिस्टम से जुड़ा था।
तन्वी हरियाणा के अंबाला शहर की रहने वाली थीं। उनके पिता डॉ. ललित मोहन एक आयुर्वेद चिकित्सक हैं। परिवार के अनुसार, तन्वी पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक दबाव में थीं। 

मौत से कुछ घंटे पहले उन्होंने पिता से करीब एक घंटे फोन पर बात की और विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. प्रियंका गुप्ता पर मानसिक उत्पीड़न, फेल करने की धमकी और अन्य परेशानियों का आरोप लगाया। तन्वी ने पिता को बताया कि वे सुबह कॉलेज मैनेजमेंट से शिकायत दर्ज कराने वाली थीं। रात ढाई बजे पिता देहरादून पहुंचे तो शनि मंदिर के पास सड़क किनारे खड़ी कार में तन्वी बेसुध अवस्था में मिलीं। पत्थर से शीशा तोड़कर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां 25 मार्च सुबह उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

देहरादून SGRR मेडिकल कॉलेज की पीजी छात्रा डॉ. तन्वी, जिनकी कार में आत्महत्या की घटना ने मेडिकल समुदाय को झकझोर दिया (सांकेतिक/फाइल फोटो)
देहरादून SGRR मेडिकल कॉलेज की पीजी छात्रा डॉ. तन्वी, जिनकी कार में आत्महत्या की घटना ने मेडिकल समुदाय को झकझोर दिया (सांकेतिक/फाइल फोटो)

पुलिस ने पटेल नगर थाने में तन्वी के पिता की शिकायत पर HOD डॉ. प्रियंका गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने HOD का बयान दर्ज किया है और कॉलेज के अन्य छात्र-छात्राओं से भी पूछताछ शुरू कर दी है। 

एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी वायरल हुई है, जिसमें तन्वी HOD से बात करते हुए कह रही हैं, “मैम, आप बताओ मैं किस-किस को खुश करूं...”। परिवार का आरोप है कि HOD ने तन्वी को थीसिस गाइड और पिछले विभागाध्यक्ष से संपर्क तोड़ने के लिए मजबूर किया, नंबर जीरो कर दिए और मानसिक-आर्थिक शोषण किया।


कॉलेज प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने पुलिस को पत्र लिखकर बताया कि तन्वी पहले भी डिप्रेशन से जूझ रही थीं और 31 दिसंबर 2025 को उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया था। उस समय अभिभावकों ने लिखित रूप में कॉलेज को सूचित किया था कि छात्रा मानसिक स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं। कॉलेज का कहना है कि तन्वी को उचित देखभाल दी जा रही थी।


यह घटना मेडिकल छात्रों में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट को उजागर करती है। भारत में पीजी मेडिकल शिक्षा के दौरान लंबे काम के घंटे, सीनियर्स का दबाव, थकान और प्रतिस्पर्धा अक्सर छात्रों को अवसाद की ओर धकेल देते हैं। तन्वी की मां भी अंबाला से देहरादून आकर बेटी के साथ रह रही थीं ताकि उनका मनोबल बना रहे। परिवार का कहना है कि बेटी ने कई बार परेशानी बताई थी, लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती गई।


पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के सभी पहलू सामने रखे जा रहे हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम, ऑडियो रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज से छात्रा के अकादमिक रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।


इस मामले ने चिकित्सा जगत और छात्र संगठनों में हलचल मचा दी है। कई डॉक्टरों और छात्रों ने सोशल मीडिया पर #JusticeForTanvi जैसे हैशटैग के साथ पोस्ट किया है। वे मेडिकल कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग, सीनियर-जूनियर संबंधों में सुधार और उत्पीड़न रोकने के लिए सख्त नीति की मांग कर रहे हैं। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल और स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले पर नजर रखे हुए हैं।


तन्वी की मौत ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि क्या मेडिकल प्रशिक्षण इतना दबावपूर्ण होना चाहिए कि युवा डॉक्टर आत्महत्या जैसा कदम उठा लें। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित मेंटल हेल्थ चेकअप, वर्किंग आवर्स की सीमा और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है।


परिवार ने न्याय की मांग की है। तन्वी के पिता ने कहा, “मेरी बेटी ने बहुत कुछ सहा। अगर HOD ने उसे परेशान नहीं किया होता तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता।” पुलिस जांच जारी है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।


यह घटना देहरादून के SGRR मेडिकल कॉलेज परिसर के आसपास हुई, जो पटेलनगर क्षेत्र में स्थित है। स्थानीय लोगों और छात्रों में सदमा है। कई लोग कह रहे हैं कि मेडिकल शिक्षा में सुधार की जरूरत है ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों!

इस समाचार के संदर्भ में, यदि आप या आपका कोई परिचित संकट में है या उसे मदद की ज़रूरत है, तो कृपया इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें:

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