उत्तराखंड में घर बनाना हुआ आसान, अब नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर, जानिए पूरी प्रक्रिया

Mandeep Singh Sajwan

देहरादून से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है जहां उत्तराखंड में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए धामी सरकार ने खुशियों वाली सौगात दी है। राज्य सरकार ने नक्शा पास कराने की पेचीदा और थकाऊ प्रक्रिया को अब इतिहास बनाने की तैयारी कर ली है। अब उत्तराखंड में घर का नक्शा पास कराने के लिए आपको विकास प्राधिकरणों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही महीनों तक फाइल के आगे बढ़ने का इंतजार करना होगा। आवास विभाग द्वारा किए गए नए सुधारों के तहत अब कम जोखिम वाले आवासीय भवनों के लिए 'सेल्फ सर्टिफिकेशन' यानी स्व-प्रमाणन की व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप 200 वर्ग मीटर तक के दायरे में घर बना रहे हैं, तो आपके द्वारा नियुक्त आर्किटेक्ट ही नक्शे को प्रमाणित कर सकेगा और उसे ही मंजूरी मान लिया जाएगा।

उत्तराखंड में घर बनाना हुआ आसान, अब नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर, जानिए पूरी प्रक्रिया


आर्किटेक्ट को मिली बड़ी जिम्मेदारी और ऑनलाइन सुविधाओं का विस्तार

सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी बल्कि आम जनता को बाबूशाही और लेटलतीफी से भी बड़ी निजात मिलेगी। इतना ही नहीं, सरकार ने इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर करीब 800 से ज्यादा प्री-अप्रूव्ड डिजाइन भी अपलोड किए हैं। 

अगर कोई नागरिक इन पहले से स्वीकृत डिजाइनों में से किसी एक को चुनता है, तो उसे किसी भी तरह की कागजी कार्रवाई या लंबी प्रतीक्षा की जरूरत नहीं होगी और निर्माण कार्य तत्काल शुरू किया जा सकेगा। आवास सचिव ने साफ कर दिया है कि सरकार का विजन 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ-साथ 'ईज ऑफ लिविंग' पर भी केंद्रित है ताकि पहाड़ों से लेकर मैदान तक विकास की गति तेज हो सके।


नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई और भारी जुर्माना

हालांकि सरकार ने सुविधा देने के साथ-साथ कड़े निर्देश भी जारी किए हैं ताकि इस छूट का गलत फायदा न उठाया जा सके। अगर कोई भी निर्माण तय मानकों के विपरीत पाया गया या आर्किटेक्ट द्वारा दी गई जानकारी गलत निकली, तो संबंधित व्यक्ति और आर्किटेक्ट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

इसमें भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। नक्शा पास कराने की इस नई व्यवस्था से उन हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली है जो तकनीकी दिक्कतों के कारण अपने घर का निर्माण नहीं कर पा रहे थे। 

अब उत्तराखंड में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम जनमानस के समय और धन की बचत पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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