चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह: भ्रम न पालें! ब्रांडेड दवा कंपनियों की तरह ही कोरोना के इलाज में कारगर हैं जेनेरिक दवाएं

उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में फैली कोरोना महामारी के चलते जहां देशभर में लाखों मरीज जान गंवा चुके हैं।

 

दवा(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे
दवा(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे

उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में फैली कोरोना महामारी के चलते जहां देशभर में लाखों मरीज जान गंवा चुके हैं और लाखों मरीजों का ही देशभर के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें से तो कई की जिंदगी मौत से जूझ रही है।



कोरोना महामारी के इस दौर में संक्रमित मरीजों को सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुफ्त दवाइयां मुहैया कराने के साथ ही तमाम जांचे मुफ्त की जा रही हैं। लेकिन, कई  ऐसे कोरोना संक्रमित मरीज हैं जो अपने घरों में आइसोलेशन में हैं और वे सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रहीं दवाइयों की जगह ब्रांडेड दवा कंपनियों की दवाइयों पर ज्यादा विश्वास कर रहे हैं जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। 



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लेकिन, इस संबंध में जब राजधानी के कुछ चुनिंदा वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों से उनकी राय जानी गई तो सभी चिकित्सा विशेषज्ञों में एकसुर में कहा कि ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों में कोई अंतर नहीं है। ऐसे में यदि कोई मरीज जेनेरिक दवाइयों को इस्तेमाल करता है तो उसको उतना ही फायदा होगा जितना ब्रांडेड कंपनियों की दवाइयों के इस्तेमाल से होगा।  मरीजों को आर्थिक तौर पर जरूर कुछ सहूलियत होंगी। अमर उजाला संवाददाता ने जब कुछ वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों से इस संबंध में उनका राय जानने कोशिश की तो उन्होंने कुछ इस अंदाज में प्रतिक्रियाएं दीं।


ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों में अंतर

चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो ब्रांडेड दवाइयां निजी दवा कंपनियों द्वारा बनाई गई दवाइयां होती हैं जिसका एक विशेष नाम होता है। जबकि, जेनेरिक दवाइयों का अपना कोई नाम नहीं होता है। हालांकि, दोनों दवाइयों में रासायनिक गुण एक जैसे ही होते हैं। जेनेरिक दवाएं उसी नाम से जानी जाती हैं जिस साल्ट से बनाई जाती हैं।


वैसे तो कोरोना मरीजों को सरकार, शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही इलाज की सारी सुविधा देने के साथ ही दवाइयां मुफ्त मुहैया कराई जा रही हैं। लेकिन, इसके बावजूद यदि लोग घरों में आइसोलेट होकर विशेषज्ञों की सलाह पर खुद ही दवाइयां ले रहे हैं तो इसमें क्या किया जा सकता है। जहां तक ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों में फर्क का सवाल है तो दोनों दवाइयों में कोई अंतर नहीं है। अलबत्ता, ब्रांडेड कंपनियों की दवाइयां जेनेरिक दवाइयों की तुलना में महंगी होती हैं। लिहाजा, जेनेरिक दवाइयों के इस्तेमाल में कोई परहेज नहीं है।

- डॉ. केसी पंत, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल


ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों में कोई अंतर नहीं होता है। दोनों ही दवाइयां उतनी ही कारगर होती हैं। वैसे तो कोरोना इलाज को लेकर कोई निश्चित दवा तो है नहीं। लेकिन, फिर भी कुछ दवाइयां हैं जो मरीजों को दी जा रही हैं। ऐसे में जो लोग घरों में आइसोलेट हैं और वे स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुहैया कराई जा रहीं दवाइयों के बजाय मेडिकल स्टोर से खरीद कर दवाइयां इस्तेमाल करना चाहते हैं तो वे जेनेरिक दवाइयां लें तो बेहतर होगा। जेनेरिक दवाइयां भी उतनी ही कारगर हैं जितनी ब्रांडेड कंपनियों की दवाइयां होती हैं।

- डॉ. एनएस बिष्ट, वरिष्ठ फिजीशियन


ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों के रासायनिक और चिकित्सकीय गुणों में कोई अंतर नहीं होता है। जेनेरिक दवाइयां भी ब्रांडेड दवाइयों की तर्ज पर इलाज में कारगर होती हैं। जबकि, जेनेरिक दवाइयां ब्रांडेड की तुलना में काफी सस्ती होती हैं। ऐसे में यदि लोग जेनेरिक दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं तो कोई हर्ज नहीं है। हालांकि, जेनेरिक दवाइयां इस्तेमाल करने पर मरीजों को इलाज और कम खर्च करना पड़ेगा।

- डॉ. प्रवीण पंवार, वरिष्ठ फिजीशियन


 

कोरोना पर रोजाना सवालों के जवाब देंगे डॉक्टर

कोरोना को लेकर इस वक्त कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं। इससे लोगों में डर भी बढ़ रहा है। दूसरा, लगातार बदल रहे स्ट्रेन के चलते लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी हैं। संक्रमण, उपचार, दवाओं और बचाव को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं।


लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया के माध्यम से इन सवालों का जवाब ढूंढ रहे हैं, जो कई बार गलत जानकारी भी दे रहे हैं। ऐसे में पाठकों की दिक्कतों को देखते हुए अमर उजाला बुधवार (12 मई) से एक नई सीरीज की शुरूआत करने जा रहा है।


अगर आपके मन में भी कोरोना को लेकर कोई सवाल है तो आप उसे टाइप कर व्हाट्सएप नंबर 7617566171 पर भेज दें। कृपया व्हाट्सएप ही करें, फोन न करें। आपके सवालों के जवाब हम विशेषज्ञ चिकि त्सकों से लेंगे और उन्हें अगले दिन के अखबार में आपके नाम के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

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