देहरादून/चमोली | ब्यूरो रिपोर्ट
ग्राउंड जीरो: उत्तराखंड की वादियों से एक ऐसी खबर आई है जिसने हर हिंदुस्तानी का सीना फख्र से चौड़ा कर दिया है। चमोली जिले के थराली तहसील के एक छोटे से गाँव रतगाँव के रहने वाले राहुल फरस्वाण अब भारतीय सेना में 'साहब' बन गए हैं। शनिवार को जब चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में पासिंग आउट परेड हुई, तो राहुल के कंधों पर लगे सितारों ने उनके दिवंगत पिता के सपनों को हकीकत में बदल दिया।
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| चेन्नई स्थित ओटीए में पासिंग आउट परेड के दौरान नवनियुक्त लेफ्टिनेंट राहुल फरस्वाण अपने परिवार के साथ। पिता के सपने को हकीकत में बदलते देख माँ की आँखों में खुशी और गर्व के आँसू छलक आए। |
6 महीने पहले पिता को खोया, पर लक्ष्य नहीं ओझल हुआ
राहुल की यह कामयाबी महज़ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक 'जुनून' की दास्तां है। आपको बता दें कि राहुल के पिता स्वर्गीय श्री महिपाल सिंह फरस्वाण, जो गाँव के पूर्व प्रधान भी थे, उनका साया महज़ 6 महीने पहले राहुल के सिर से उठ गया था। पिता का जाना एक गहरा सदमा था, लेकिन राहुल ने हार मानने के बजाय उनके 'राष्ट्र सेवा' के सपने को अपनी ताकत बना लिया।
"राहुल के जज्बे को सलाम: पीछे कई असफलताएं थीं, लेकिन सामने सिर्फ एक लक्ष्य—भारतीय सेना की वर्दी!"
माँ ने संभाली खेती, बेटे ने संभाली 'साख'
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| चेन्नई ओटीए में ऑफिसर बनने के बाद लेफ्टिनेंट राहुल फरस्वाण अपनी माँ के साथ। राहुल के हाथ में उनके दिवंगत पिता (स्व. महिपाल सिंह फरस्वाण) की तस्वीर इस बात का गवाह है कि भले ही आज पिता दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद और सपना राहुल के सीने पर लगे सितारों के साथ हमेशा मौजूद है। |
राहुल की इस जीत के पीछे एक माँ का संघर्ष भी है। घर की जिम्मेदारी और खेती-बाड़ी संभालते हुए माँ ने कभी बच्चों की पढ़ाई में आंच नहीं आने दी।
- प्राइमरी शिक्षा: श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल
- हायर एजुकेशन: डी.ए.वी. पीजी कॉलेज, देहरादून
- नया मुकाम: लेफ्टिनेंट, भारतीय सेना
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| चेन्नई ओटीए से ऑफिसर बनने के बाद लेफ्टिनेंट राहुल फरस्वाण अपने परिवार और माता-पिता के साथ। उनके हाथ में दिवंगत पिता (स्व. महिपाल सिंह फरस्वाण) की तस्वीर एक भावुक क्षण है, जो दर्शाता है कि उनका आशीर्वाद हमेशा राहुल के साथ है। पीछे आसमान में तिरंगे के रंग की छटा और लहराता भारत का ध्वज इस जीत को और भी भव्य बना रहा है। |
इलाके में जश्न का माहौल
राहुल के बड़े भाई शिक्षक हैं और बहन होटल इंडस्ट्री में हैं, लेकिन राहुल ने बंदूक थामकर देश की सेवा चुनी। आज पूरे थराली क्षेत्र में मिठाई बांटी जा रही है। राहुल ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो पहाड़ जैसी मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं।
This news is submitted by Mr. Kuldeep Farswan (kuldeepfarswan7088[@]gmail.com).