Uttarkashi

Vimaleshwar Mandir Uttarkashi: क्रोध शांति के लिया जहाँ भगवान परशुराम ने तप किया

Vimaleshwar Mahadev Mandir Uttarkashi front view.
उत्तरकाशी के वरुणावत पर्वत में स्थित – Vimaleshwar Mandir Uttarkashi 

Vimaleshwar Mandir Uttarkashi: सीमावर्ती जिले उत्तरकाशी के वरुणावत पर्वत पर स्थित भगवान विमलेश्वर महादेव मंदिर एक अति मनोरम, शांत और आध्यात्मिक प्रेरणा से परिपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह ग्राम संग्राली, जिसमें बाड़ाहाट के राजा श्री कंडार देवता का निवास स्थल है के ऊपर स्थित है। 

इस दिव्य मंदिर के संबंध में मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां प्रार्थना करते हैं, भगवान शिव उनकी प्रत्येक मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। इस मंदिर में निःसंतान दंपति को पूजा विशेष विधान है, जिससे उन्हें संतान रूपी फल प्राप्त होता है। 

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“विमलेश्वर” (Vimaleshwar) नाम संस्कृत शब्दों से लिया गया है और इसका अर्थ होता है, विमल(Vimala) इसका अर्थ है “शुद्ध”, “निर्दोष”, “निर्मल” या “दाग रहित“। यह शब्द किसी ऐसी वस्तु या व्यक्ति को दर्शाता है जो पूरी तरह से शुद्ध और अपवित्रता से मुक्त हो।

वहीं  ईश्वर (Ishwar) यह शब्द “ईश्वर” या “भगवान” के लिए प्रयोग होता है, जो कि “भगवान” या “सर्वशक्तिमान” का प्रतीक है।

    इस प्रकार, विमलेश्वर का अर्थ होता है “शुद्धता के भगवान” या “वह दिव्य जो शुद्ध और निर्दोष है”। यह नाम विशेष रूप से भगवान शिव को संदर्भित करता है, जो शुद्धता और निष्कलंकता का प्रतीक होते हैं।

    विमलेश्वर महादेव मंदिर उत्तरकाशी का इतिहास 

    स्कंद पुराण में मान्यता है कि भगवान परशुराम के भीतर प्रतिशोध इतना अधिक था कि धरती को 21 बार क्षत्रिय विहीन करने के पश्चात भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। परशुराम ने  भगवान दत्तात्रेय के निर्देशन पर अपने गुरु भगवान शिव की तपस्या करने का निर्णय लिया।  उन्होंने अपना क्रोध शांत करने के लिए वरुणावत पर्वत के शिखर एक शिवलिंग की स्थापना की और यहाँ तप करने लगे। 

    Vimaleshwar mahadev Mandir Uttarkashi internal and backside view collage grid.
    Vimaleshwar Mandir Uttarkashi | PC – UHN

    भगवान शिवजी ने उनकी पूजा और भक्ति-निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए थे। तब परशुराम का क्रोध शांत हुआ। इसके लिए परशुराम ने भगवान शिव यहां पर शिवलिंग के रुप में विराजमान होने की बात कही। तब से लेकर आज तक आसपास के ग्रामीण इस स्थान को विमलेश्वर महादेव के नाम से भी पूजते हैं। 

    विमलेश्वर महादेव मंदिर उत्तरकाशी – कैसे पहुंचे?

    ऋषिकेश से उत्तरकाशी की दूरी करीब 170 किमी है। श्रद्धालु देहरादून और ऋषिकेश से बस में सवार होकर उत्तरकाशी के बस अड्डा पहुंचेंगे। फिर श्रद्धालु यहां से टैक्सी, मैक्स और निजी वाहनों में सवार होकर करीब 12 किमी दूर वरुणावत के शीर्ष पर पहुंचेंगे। वाहन से उतरने के बाद मात्र 50 मीटर की पैदल दूरी तय कर आप विमलेश्वर महादेव (Vimaleshwar Mandir Uttarkashi) के दर्शन पाएंगे। 

    Vimaleshwar Mandir Uttarkashi: क्रोध शांति के लिया जहाँ भगवान परशुराम ने तप किया
    Vimaleshwar Mandir Uttarkashi | PC – UHN

    पंडित दिवाकर नैथानी कहते हैं, आदिकाल से यहां भगवान शिव का पौराणिक शिवलिंग है। सावन मास में श्रद्धालु इसी शिवलिंग में दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। सावन मास में निःसंतान दंपति के पूजा करने से भगवान शिव संतान सुख का आशीष प्रदान करते हैं। 

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    मंदिर के सेवक प्रद्युम्न नौटियाल बताते हैं कि सावन मास में स्थानीय ग्रामीण और कांवड़ यात्री यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। चीड़ और देवदार के वृक्षों के बीच स्थित यह विमलेश्वर महादेव अपने आप में एक अद्भुत और रमणीय स्थल है।  यदि आप भी ऐसे किसी वातावरण में ध्यान करना चाहते हैं तो आप इस पवित्र स्थल का विचार कर सकते हैं। 

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    महत्वपूर्ण लिंक्स तथा संपर्क सूत्र

    क्रम संख्याकार्यालयसंपर्क सूत्र
    1उत्तरकाशी जिलाधिकारी (DM)01374-222280
    2उत्तरकाशी पुलिस अधीक्षक (SP)9411112733, 01374-222116
    3आईटीबीपी महिडांडा (ITBP)01374-234383
    4जिला चिकित्सालय (Hospital) 01374-222738

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