
गैरसैंण में आज से विधानसभा सत्र शुरू, धामी सरकार पेश करेगी 7400 करोड़ का अनुपूरक बजट | उत्तराखंड न्यूज़
गैरसैंण (चमोली)। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 से राज्य की पंचम विधानसभा का दो दिवसीय सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। वर्ष 2026 के इस तीसरे सत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार का यह संभावित अंतिम विधायी सत्र है। दो दिवसीय (27 और 28 अक्टूबर) कार्यसूची वाले इस सत्र के दौरान धामी सरकार राज्य के विकास कार्यों, ढांचागत योजनाओं और चालू वित्तीय वर्ष की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सदन के पटल पर लगभग 7400 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) पेश करेगी। इसके साथ ही सरकार 8 से 10 महत्वपूर्ण विधेयक और विभिन्न विभागों की 5 वार्षिक व प्रगति रिपोर्ट (प्रतिवेदन) भी सदन में प्रस्तुत करेगी।
सत्र के पहले दिन दोपहर 3 बजे अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा, लेकिन इससे पूर्व सदन की कार्यवाही राज्य के दो दिवंगत दिग्गजों—पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (रि.) और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट—को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ शुरू होगी। परंपरा और नियमानुसार शोकाकुल श्रद्धांजलि के कारण सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल (Question Hour) आयोजित नहीं किया जाएगा।
दूसरी ओर, चुनाव पूर्व के इस सत्र में राजनीतिक तापमान चरम पर है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने राज्य में चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड, बढ़ती बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, भू-कानून और भर्ती घोटालों जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं, प्रदेश प्रधान संगठन समेत कई जन-संगठनों और कर्मचारी संघों ने अपनी मांगों के समर्थन में विधानसभा घेराव का ऐलान किया है।
जन-आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों की संभावना को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने गैरसैंण व भराड़ीसैंण क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
क्या है अनुपूरक बजट और विधायी कार्यसूची?
उत्तराखंड सरकार द्वारा लाया जा रहा लगभग 7,400 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट मुख्य रूप से राज्य के अवस्थापना (Infrastructure) विकास, सड़कों एवं पुलों के निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, आपदा प्रबंधन और स्वरोजगार योजनाओं पर केंद्रित है। चूंकि यह चुनाव से ठीक पहले का सत्र है, इसलिए बजट में ग्रामीण विकास, किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए जाने की संभावना है।
अनुपूरक बजट के अलावा, सरकार इस दो दिवसीय सत्र के दौरान 8 से 10 नए और संशोधन विधेयकों को पटल पर रखने जा रही है। इन विधेयकों में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने, स्थानीय निकायों के सुधारीकरण, और रोजगार संवर्धन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट समेत विभिन्न राज्य विभागों और आयोगों के 5 महत्वपूर्ण प्रतिवेदन भी सदन की मेज पर रखे जाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण पहले ही गैरसैंण पहुंच चुके थे और उन्होंने सत्र की तैयारियों का जायजा लिया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के सुचारू संचालन के लिए सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की और सभी दलों से विधायी कार्यों में सहयोग की अपील की।
पहले दिन का विशेष एजेंडा: श्रद्धांजलि एवं प्रश्नकाल स्थगन
सत्र का पहला दिन यानी 27 अक्टूबर का सत्र भावुक और गरिमामय माहौल में शुरू हो रहा है। उत्तराखंड की राजनीति के दो पुरोधाओं—पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट—के हालिया निधन पर पूरा सदन उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है।
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और पारदर्शी नीतियों (विशेष रूप से सशक्त लोकायुक्त और ट्रांसफरेबल एक्ट) के लिए अपनी अलग पहचान बनाई थी। वहीं, हीरा सिंह बिष्ट ने राज्य आंदोलन से लेकर राज्य निर्माण के बाद तक जनहित के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया।
संसदीय परंपराओं और सम्मान के प्रतीक स्वरूप, दिवंगत नेताओं की याद में शोक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इस वजह से सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल संचालित नहीं किया जाएगा। विधायकों द्वारा लगाए गए तारांकित और अतारांकित प्रश्नों के उत्तर अब लिखित रूप में पटल पर रखे जाएंगे या अगले दिन की कार्यसूची में समायोजित किए जाएंगे।
विपक्ष की आक्रामक रणनीति और ज्वलंत मुद्दे
सत्र भले ही दो दिनों का छोटा हो, लेकिन विपक्ष ने सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की पूरी रणनीति बना ली है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में तय किया गया कि सरकार से जनहित के गंभीर सवालों पर तीखे जवाब मांगे जाएंगे।
विपक्ष के मुख्य हमले निम्नलिखित मुद्दों पर केंद्रित रहने वाले हैं:
- अंकिता भंडारी हत्याकांड: राज्य के इस सबसे बहुचर्चित हत्याकांड में वीआईपी (VIP) के नाम के खुलासे और न्याय प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।
- बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाएं: राज्य के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में पारदर्शिता की कमी और संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग पर विपक्ष हंगामा कर सकता है।
- महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था: प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं, विशेषकर महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर नियंत्रण पाने में पुलिस प्रशासन की विफलता का मुद्दा उठाया जाएगा।
- मूल निवास 1950 और सशक्त भू-कानून: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में जमीनों की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए एक कड़े भू-कानून और 1950 के मूल निवास की नीति को लागू करने की जन-मांग पर सरकार से स्पष्ट रुख की मांग की जाएगी।
जनाक्रोश, आंदोलन और त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा
गैरसैंण सत्र के दौरान केवल विधानसभा के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर भी राजनीतिक गर्माहट देखने को मिल रही है। प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था से जुड़े ‘प्रदेश प्रधान संगठन’ ने अपनी वित्तीय स्वायत्तता, मानदेय वृद्धि और अधिकारों के विकेंद्रीकरण की मांगों को लेकर भराड़ीसैंण विधानसभा घेराव की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त कई अन्य कर्मचारी संगठन और बेरोजगार संगठन भी अपनी मांगों के समर्थन में गैरसैंण कूच कर रहे हैं।
इस भारी विरोध-प्रदर्शन और घेराव के ऐलान को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन और उत्तराखंड पुलिस ने अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था की है:
- त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा: भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर तीन स्तरीय सुरक्षा बैरियर लगाए गए हैं।
- भारी पुलिस बल की तैनाती: गैरसैंण, दिवालीखाल, और भराड़ीसैंण में प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC), कमांडो दस्ता और कई जिलों की पुलिस तैनात की गई है।
- यातायात का डायवर्जन: आम जनता और राहगीरों के लिए गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग पर विशेष यातायात डायवर्जन प्लान लागू किया गया है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो और यातायात भी प्रभावित न हो।
गैरसैंण का राजनीतिक व रणनीतिक महत्व
गैरसैंण केवल उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी ही नहीं है, बल्कि यह राज्य निर्माण आंदोलन की भावनाओं का केंद्र बिंदु भी रहा है। राज्य के मैदानी इलाकों (देहरादून) के बजाय पर्वतीय क्षेत्र (गैरसैंण) में सत्र आयोजित करने का अपना एक बड़ा राजनीतिक संदेश होता है।
चुनाव से ठीक पहले आयोजित हो रहे इस सत्र के माध्यम से धामी सरकार राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना चाहती है। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि सरकार गैरसैंण में महज दो दिनों का सांकेतिक सत्र आयोजित करके केवल औपचारिकता पूरी कर रही है, जबकि यहां लंबे सत्रों का आयोजन होना चाहिए ताकि पहाड़ों की वास्तविक समस्याओं पर गहन चर्चा हो सके।
दो दिनों तक चलने वाला यह सत्र राज्य की भावी राजनीतिक दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगा, क्योंकि 7,400 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित होने के साथ ही राज्य चुनावी मोड में पूरी तरह से प्रवेश कर जाएगा।
