देहरादून: मंगलवार का दिन उत्तराखंड के लिए काल बनकर आया। पहाड़ से लेकर मैदान तक, सड़कों पर मानो मौत का तांडव मच गया। महज 24 घंटों के भीतर पाँच अलग-अलग सड़क हादसों में नौ लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि चार अन्य जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इन हादसों में सबसे दर्दनाक कहानी हल्द्वानी में घटी, जहाँ एक ही परिवार के तीन सदस्य मौत की नींद सो गए और एक हंसता-खेलता परिवार एक पल में बिखर गया।
एक माँ से मिलकर लौट रहा था परिवार, फिर लौटी सिर्फ खबर
यह कहानी है हल्द्वानी के जाहिद और उनके परिवार की। उनकी माँ, अख्तरी, रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में कैंसर का इलाज करवा रही थीं। सोमवार की रात, जाहिद अपने भाई साजिद, सास शाहजहां, नानी अफसरी और बहन मुस्कान के साथ उनसे मिलने गए थे। सभी के मन में एक ही प्रार्थना थी कि माँ जल्दी ठीक हो जाए। रात के दो बजे, जब वे अपनी माँ से मिलकर एक सुकून भरी मुस्कान के साथ वापस हल्द्वानी लौट रहे थे, तो शायद उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी।
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रामपुर रोड पर बेलबाल मंदिर के पास एक तीखे मोड़ पर, सामने से आ रही एक तेज़ रफ्तार स्कॉर्पियो ने उनकी छोटी कार को ज़ोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। चंद लम्हों में, माँ से मिलकर लौट रहे परिवार के तीन सदस्यों - साजिद, शाहजहां और अफसरी - ने हमेशा के लिए अपनी आँखें मूंद लीं।
इस दर्दनाक हादसे में जाहिद और मुस्कान घायल हो गए। जाहिद एक निजी अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि मुस्कान को मामूली चोटों के बाद छुट्टी दे दी गई है। उनके घर में मातम छाया हुआ है। पुलिस ने स्कॉर्पियो चालक को हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच जारी है।
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कहीं बाइक फिसली, तो कहीं टक्कर ने ली जान
एक ही दिन में दर्द की यह कहानी सिर्फ हल्द्वानी तक सीमित नहीं थी।
- गौलापार में सड़क पार कर रही 65 वर्षीय दुर्गा देवी को एक तेज़ रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
- टिहरी में लंबगांव के पास एक बाइक खाई में गिर गई। इस हादसे में दो युवा, बालकृष्ण और विपिन, हमेशा के लिए खामोश हो गए।
- सितारगंज में भी सोमवार रात हुए एक हादसे में सोनू जोशी ने दम तोड़ दिया, जबकि गोविंद नामक एक अन्य घायल की हल्द्वानी में इलाज के दौरान मौत हो गई।
इन हादसों ने एक बार फिर उत्तराखंड की सड़कों पर सुरक्षा के सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही दिन में इतनी मौतें यह बताने के लिए काफी हैं कि पहाड़ी रास्तों और तेज़ रफ्तार के जानलेवा कॉम्बिनेशन पर लगाम लगाना कितना ज़रूरी हो गया है। एक परिवार की कहानी, और कई घरों में बुझते चिराग... मंगलवार का दिन हमेशा उत्तराखंड के लिए एक दुखद स्मृति बनकर रहेगा।
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