नैनीताल, उत्तराखंड: नैनीताल के प्रसिद्ध नंदा-सुनंदा मेले में पशुबलि की सदियों पुरानी प्रथा को फिर से शुरू करने की मांग उठ रही है। इस पर फिलहाल प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन अब एक श्रद्धालु ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर बलि की अनुमति और इसके लिए एक विशेष स्थान तय करने की गुहार लगाई है।
यह मामला नंदा-सुनंदा मेले की परंपरा और पशु क्रूरता के कानूनों के बीच एक बड़ा टकराव पैदा कर रहा है।
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क्या है नंदा-सुनंदा मेले में पशुबलि का मामला?
लाइव हिंदुस्तान की एक न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार नैनीताल निवासी पवन जाटव ने यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नंदा-सुनंदा देवी को मनोकामना पूरी होने पर पशुबलि देना हजारों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का हिस्सा है। लेकिन खुले में और मंदिर परिसर के पास बलि पर रोक लगने से भक्तों को परेशानी हो रही है।
याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि बलि पर प्रतिबंध के कारण अक्सर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, क्योंकि कई संगठन इसका विरोध करते हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, मल्लीताल लकड़ी टाल की जमीन पर एक अस्थायी 'बलि स्थल' बनाने की अनुमति दी जाए।
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नंदा-सुनंदा मेले में पशुबलि की मांग पर अब हाई कोर्ट करेगा सुनवाई
उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिका की सुनवाई की तिथि आज नियत की गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस मामले में आस्था और कानून के बीच किस तरह संतुलन बनाता है। क्या कोर्ट बलि की अनुमति देगा और इसके लिए कोई स्थान निर्धारित करेगा, या फिर पशु क्रूरता निवारण कानूनों को प्राथमिकता देते हुए प्रतिबंध को बरकरार रखेगा। यह फैसला उत्तराखंड के इस प्रसिद्ध मेले की भविष्य की परंपराओं को एक नई दिशा दे सकता है।
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