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भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला पुल भारी बारिश के बाद नदी में समाया, 50 गांवों का संपर्क टूटा


 बीती रात से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला कुलागाड़ के पास बना पक्का पुल नदी में समा गया। जिस कारण भारत-चीन सीमा से लगे 50 से अधिक गांवों और उच्च हिमालयी क्षेत्रों का संपर्क दुनिया से कट गया। सेना की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। बीआरओ ने वर्ष 1999 में इस पुल को बनाया था।


उच्च हिमालयी क्षेत्र में बुधवार रात भारी बारिश के कारण यहां बरसाती नाले उफना गए। जिस कारण टनकपुर-तवाघाट नेशनल हाईवे पर कुलागाड़ के निकट बना पक्कापुल भरभराकर नदी में समा गया। पुल टूटने से भारत-चीन सीमा के 50 से अधिक गांवों का संपर्क शेष दुनिया से कट गया है। पुल बह जाने से उच्च हिमालयी गांवों के लोग फंस गए हैं और  सेना की दिक्कतें भी बढ़ गईं। पुल की दूसरी तरफ कई वाहन भी फंसे हुए हैं। पुल के बह जाने से दारमा, चौदांस, व्यास के साथ ही क्षेत्र के इन 50 से अधिक गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी का वेग बेहद तेज होने से लोग पैदल भी आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं। अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम, धारचूला ने बताया कि कुलागाड़ पुल बह जाने से बड़ी आबादी अलग-थलग पड़ गई है। फिलहाल बीआरओ को यथाशीघ्र पैदल पुल बनाने के साथ वैली ब्रिज का काम शुरू करने को कहा गया है। लोहे के और पत्थर नदी में डालकर वैकल्पिक रास्ता बनाया जा रहा है।  

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