भारी बारिश के बाद उत्तराखंड में 437 सड़कें बंद, जगह-जगह फंसे यात्री, बदरीनाथ हाईवे तीसरे दिन भी नहीं खुला

उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश से सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं।


 उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश से सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। रविवार को नेशनल हाईवे, राज्य मार्ग, जिला मार्ग और ग्रामीण सड़कों को मिलाकर कुल 437 सड़कें बंद चल रही थी। इस वजह से राज्य भर में लोगों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना उठाना पड़ा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता हरिओम शर्मा ने बताया कि रविवार सुबह तक राज्य भर में कुल 437 सड़कें बंद थी और इन्हें खोलने के प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि रविवार को कई स्थानों पर मौसम साफ होने की वजह से सड़क खोलने के काम में तेजी आई। उन्होंने कहा कि सड़कों को खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रदेश भर में 450 जेसीबी व अन्य भारी मशीनों को लगाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रमुख सड़कों को 12 घंटे के भीतर खोलने का लक्ष्य रखा गया है।


चमोली जिले में बदरीनाथ हाईवे समेत 87 सड़कें बंद

चमोली जिले में बारिश ने जमकर कहर बरपाया है। जिले में बदरीनाथ हाईवे समेत 87 सड़कें बंद हो गई है। कई इलाकों का जिला मुख्यालय समेत बाकी इलाकों से संपर्क कट गया है। बदरीनाथ हाईवे चटवापीपल, कर्णप्रयाग बाबा आश्रम, क्षेत्रपाल, टंगणी, काली मंदिर जोशीमठ, गोविंदघाट में अवरुद्ध हुआ था, जिसे खोल दिया गया है। पर हाईवे अभी भी रंड़ाग ग्लेशियर प्वाइंट, कंचनजंगा और लामबगड़ में बंद है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी ने बताया कि बंद मार्गों को खोलने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बदरीनाथ हाईवे कई स्थानों पर बाधित हुआ है। कर्णप्रयाग-गैरसैंण मार्ग भी मालसी के पास बंद पड़ा है। कर्णप्रयाग-थराली मार्ग आमसौड़ में थराली तिराहे के पास बाधित हुआ है। बदरीनाथ से बदरीलाल, मोहन सिंह, उमेश मेहता ने बताया दो दिन से मार्ग बाधित होने से यहां के निवासियों को आवश्यक सामाग्री नहीं मिल रही है। पोखरी के गोविन्द सिंह , राजेन्द्र असवाल ने बताया पीएमजीएसवाई की सडकें सबसे अधिक बाधित होने से ग्रामीण जन जीवन प्रभावित हुआ है। इधर, रैंणी गांव पर भूस्खलन का खतरा लगातार मंडरा रहा है। स्थानीय ग्रामीण गांव का अस्तित्व बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। यहां लगातार भू-कटाव हो रहा है। नीती-मलारी हाईवे पर भी यातायात शुरू नहीं हो पाया है।


टिहरी में दो ग्रामीण मार्ग बंद

ऋषिकेश-श्रीनगर राजमार्ग संख्या 58 शिवपुरी के पास सुबह से बंद था, जिसे दोहपर में खोल दिया गया है। जनपद में दो ग्रामीण संपर्क सड़क मार्ग भी बंद हैं, जिन्हें शाम तक खोल दिया जायेगा। यह जानकारी देते हुये आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट का कहना है कि राजमार्ग संख्या 58 को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। ग्रामीण मार्गों को खोलने का काम जारी है। यहां पर जेसीबी काम कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जनपद में बीते 24 घंटों में औसतन 27.6 एमएम बारिश हुई है। देवप्रयाग व मायाकुंड मुनिकीरेती में गंगा जल स्तर नियंत्रण रेखा में बह रहा है। देवप्रयाग में जल स्तर 460.10 मीटर और मायाकुंड मुनिकीरेती में 339.8 मीटर है। जो कि खतरे के निशान से नीचे है।


पौड़ी में 94 मोटरमार्गों पर यातायात ठप

रविवार को भी सुबह से बारिश होती रही। लगातार तीन दिनों से हो री बारिश से जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश से जिले के 94 मोटरमार्गों पर आवाजाही बंद हो गई है। जिनमें ग्रामीण, जिला व अन्य जिला मोटरमार्ग शामिल है। मोटरमार्गों के बंद होने से इन मोटरमार्गों से जुड़े ग्रामीण परेशान हैं। बारिश के चलते कई आवासीय भवनों को भी खतरा पैदा हो गया है। रविवार को सुबह से ही बारिश होती रही। लगातार हो रही बारिश से जिले के 94 मोटरमार्गों पर यातायात ठप पड़ा हुआ है। इन मोटरमार्गा पर मलबा व बोल्डर आने से यातायात बंद हो गया है। हालांकि इन मोटरमार्गों को खोलने के लिए जेसीबी लगी हुई है लेकिन रूक-रुक कर हो रही बारिश से मोटरमार्गों को खोलने में दिक्कतें हो रही है।


बारिश के चलते पाबौ ब्लाक के मिलाई निवासी भोपाल सिंह के आवासीय भवन का पुश्ता टूटने से भवन को खतरा पैदा हो गया है। पौड़ी के गड़ोली में इंदिरा के आवासीय भवन का पुश्ता टूटने से भवन खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल राहत दिलाने की मांग की है। डांग निवासी सतेंद्र सिंह सजवाण का कहना है कि सिसई-डांग-जामरी मोटरमार्ग पर डांग दीवा मंदिर के पास पहाड़ी से मलबा व बोल्डर आने से मार्ग बंद हो गया है। बताया कि पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को बताने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे ग्रामीणों को अपने रोजमर्रो के काम निपटाने के लिए कई किमी का सफर तय करके पनास के रास्ते बीरोंखाल व धुमाकोट जाना पड़ रहा है।


ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे तीसरे दिन भी नहीं खुल पाया

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग तीसरे दिन भी बाधित रहा। बीती देर रात तोताघाटी के पास हाईवे से मलबा हटा दिया गया था। लेकिन रविवार तड़के कौडियाला के पास हाईवे पर फिर भारी मात्रा में मलबा गिरने से यातायात बहाल नहीं हो पाया। एनएच के अधिकारी अब सोमवार तक मार्ग खुलने की बात कह रहे हैं। रविवार को भी छोटे वाहन वाया नरेन्द्रनगर-खाडी-देवप्रयाग होकर तथा भारी वाहन वाया चंबा-टिहरी श्रीनगर भेजे गये। रविवार को बारिश के कारण शिवमंदिर कौडियाला के पास भारी मलबा आ गया। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हो गया। तोताघाटी में मलबा हटा रही जेसीबी मशीनों को कौडियाला लाया गया। ऑलवेदर रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मियों ने मलबा हटाने का काम शुरू किया।


लेकिन लगातार हो रही तेज बारिश के चलते मलबा हटाने में दिक्कत आई। संडे को भी छोटे वाहन नरेन्द्रनगर-देवप्रयाग और भारी वाहन चंबा-टिहरी होकर श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी भेजे गये। एनएच के सहायक अभियंता एसके द्विवेदी ने बताया कि तोताघाटी के पास गिरा मलबा हटा दिया गया है। लेकिन कौडियाला एवं व्यासी के पास मलबा गिर रहा है। इसे जेसीबी मशीन से हटाया जा रहा है। लेकिन बारिश के चलते परेशानी आ रही है। मुनिकीरेती के थानाप्रभारी कमलमोहन भंडारी ने बताया कि मार्ग बाधित होने पर रूट डायवर्ट कर दिया गया है। भारी वाहन चंबा-टिहरी होकर एवं हल्के वाहन खाडी-देवप्रयाग होकर श्रीनगर भेजे जा रहे हैं।


नैनीताल जिले में 22 सड़कें बंद, आधा दर्जन परिवारों ने घर छोड़े

नैनीताल जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते 22 सड़कें बंद हो गई हैं। गरमपानी में घर पर पेड़-बोल्डर गिरने के बाद करीब आधा दर्जन से अधिक परिवारों ने घर छोड़ दिए। भवाली में रोडवेज डिपो की दीवार बारिश के कारण ढह गई। वहीं लाइन पर पेड़ गिरने से पर्वतीय इलाकों में कई जगह बिजली गुल हो गई है। गरमपानी, मुक्तेश्वर समेत कई इलाकों में रविवार पूरे दिन बिजली सप्लाई ठप रही। नैनीताल में सुबह की शुरुआत जोरदार बारिश के साथ हुई। दोपहर बाद बारिश रुकी तो कोहरा छा गया। घने कोहरे के चलते लोगों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। जिला आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक बारिश के बाद जिले से गुजरने वाले सभी हाईवे खुले हैं। मगर 21 ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही बंद है। रविवार को छह बंद सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया है। दो प्रमुख मार्गों भुजान-बेतालघाट और मौना-कालापाताल फिलहाल बंद हैं।


अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग मलबा आने से दूसरे दिन भी रहा बंद

आसमान से बरसी आफत ने जिदगी की रफ्तार थाम ली है। लगातार हो रहीं बारिश से अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में मकड़ाऊ के पास पहाड़ी दरकने से मलबा आ गया। जिस वजह से दूसरे दिन रविवार को भी मार्ग वाहनों के लिए पूरी तरह बंद रहा। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं जिले के 7 ग्रामीण संपर्क मार्ग भी बंद चल रहे हैं। दरअसल बीते गुरुवार देर रात से जिले भर में बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रहीं बारिश लोगों के लिए आफत बनकर बरस रहीं है। जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। वहीं तेज बारिश के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग में मकड़ाऊ के पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा आ गया है। सड़क का एक हिस्सा भी थस गया। जिससे मार्ग में यातायात पूरी तरह बंद है। मार्ग में दूसरे दिन रविवार को भी नहीं खुल सका। जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा।


पिथौरागढ़ जिले का शेष जगत से कटा सड़क संपर्क

पिथौरागढ़ को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले सभी मार्ग बंद हो गए हैं। जिससे सीमांत जनपद में लोगों को कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।घाट एनएच चार दिन बाद खुलने के तीन घंटे बाद शुक्रवार को फिर बंद हो गया था। इस एनएच में अब भी आवाजाही शुरू नहीं हो सकी है। घाट एनएच के बंद हो जाने के बाद 5 घंटे से अधिक सफर कर लोग हल्द्वानी, अल्मोड़ा जाने के लिए सेराघाट मार्ग का प्रयोग कर रहे थे। रविवार को यह मार्ग भी जुलियाखेत के पास बोल्डर आने से बंद हो गया। इस तरह अब सीमांत जनपद पूरी तरह से अलग थलग पड़ गया है।घाट एनएच में दिल्ली बैंड के समीप करीब 70 घंटे बाद शुक्रवार को सड़क खुलने के 3घंटे बाद बंद हो गई थी।तब से यह सड़क दिल्ली बैंड, चुपकोट, शहीद द्वार के समीप मलबा आने से बंद है।बारिश के कारण लगातार बोल्डर गिरने से सड़क खोलने का काम भी प्रभावित हो रहा है। एनएच के बंद रहने से कई जगह सड़क में वाहन फंसे हुए हैं।

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