उत्तराखंड: सरकार के बांटे गए ऑक्सीमीटर दे रहे गलत रीडिंग, हरकत में आया प्रशासन, वितरण पर लगाई रोक

 

ऑक्सीमीटर
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अल्मोड़ा जिले में सरकार की ओर से बांटे गए ऑक्सीमीटर में गलत रीडिंग मिलने के बाद जैसे ही इसकी जानकारी प्रशासन को लगी तो वहां खलबली मच गई। प्रशासन ने तत्काल ऑक्सीमीटर के वितरण पर रोक लगा दी। साथ ही बांटे गए ऑक्सीमीटर भी वापस मंगा लिए। बताया जा रहा है कि ये ऑक्सीमीटर चीन निर्मित हैं।



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बृहस्पतिवार को इनका परीक्षण कराया जाएगा। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित सप्लायर को ब्लैक लिस्ट करने के साथ उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। द्वाराहाट के विधायक महेश नेगी ने कहा है कि खरीदारी सीडीओ के माध्यम से हुई है, लिहाजा इसकी पूरी जिम्मेदारी सीडीओ की है।


अल्मोड़ा जिले के विधायकों ने कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए और उपकरण खरीदने के लिए धनराशि अवमुक्त की है। गांवों में ऑक्सीजन लेवल नापने के लिए सभी आशा कार्यकर्ताओं को चार-चार ऑक्सीमीटर दिए जाने हैं। इसके तहत 22.40 लाख रुपये की विधायक निधि से जिले के लिए 4000 ऑक्सीमीटर खरीदे गए हैं। देहरादून की फर्म ने ये ऑक्सीमीटर जिले को उपलब्ध कराए हैं। एक ऑक्सीमीटर की कीमत 560 रुपये है। स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों ने आशा कार्यकर्ताओं को ऑक्सीमीटर का वितरण शुरू कर दिया था, लेकिन ये ऑक्सीमीटर गलत रीडिंग दे रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय ने ऑक्सीमीटर वापस मंगा लिए हैं।


स्वस्थ लोगों का ऑक्सीजन स्तर भी 90 से नीचे दिखाया तो मची खलबली

द्वाराहाट और चौखुटिया तहसील क्षेत्रों में वितरण के लिए विधायक निधि से 750 ऑक्सीमीटर पहुंचे थे। बुधवार को इनका वितरण होना था। चौखुटिया ब्लॉक के लिए आए 360 ऑक्सीमीटरों से जब बीडीओ हर्ष सिंह अधिकारी और अन्य स्टाफ ने अपना ऑक्सीजन स्तर जांचा तो सभी की रीडिंग 88 और उससे कम निकलीं। 90 से नीचे की रीडिंग दिखाने पर वहां हड़कंप मच गया। बाद में पता चला कि मशीन की खराबी के चलते ही गलत रीडिंग दिख रही है। ऐसी ही शिकायतें द्वाराहाट क्षेत्र से भी मिलीं।


गलत रीडिंग की शिकायत मिलने पर ऑक्सीमीटर के वितरण पर रोक लगा दी गई है। साथ ही बांटे जा चुके ऑक्सीमीटर वापस मंगा लिए हैं। एक-दो लॉट में आए ऑक्सीमीटरों के गलत रीडिंग देने की शिकायत मिली है। जिले को सप्लाई किए गए सभी ऑक्सीमीटरों की स्वास्थ्य विभाग से जांच कराई जाएगी। यदि गुणवत्ता में कमी पाई गई तो संबंधित फर्म को ब्लैक लिस्ट कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अभी फर्म को भुगतान नहीं किया गया है।

-नवनीत पांडे, मुख्य विकास अधिकारी, अल्मोड़ा। 


विधायक निधि से जिले भर में हर आशा कार्यकर्ता को क्षेत्र के लिए चार-चार ऑक्सीमीटर बांटे जाने हैं। ऑक्सीमीटर की रीडिंग गलत आने की शिकायत मिली है। सीडीओ कार्यालय से रीडिंग की गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही ऑक्सीमीटर बांटने पर रोक लगाई गई। 

- डॉ. सविता ह्यांकी, मुख्य चिकित्साधिकारी, अल्मोड़ा

ब्रांडेड के बजाय चीनी कंपनी से किया सौदा

विधानसभा उपाध्यक्ष और अल्मोड़ा के विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ने कहा कि ब्रांडेड कंपनी के बजाय चीनी कंपनी से ऑक्सीमीटर क्रय करने से सरकार और प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर संबंधित कंपनी को ऑक्सीमीटर वापस कर भुगतान न करने और कंपनी के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने निर्देश दिए हैं। साथ ही वर्ष 2020-21 में भी 1.15 करोड़ की विधायक निधि से क्या खरीद हुई है, इसका विवरण भी उपलब्ध कराएं।


विधायक चौहान ने कहा कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए सभी विधायकों की विधायक निधि से स्वास्थ्य उपकरण क्रय करने के लिए एक-एक करोड़ की धनराशि देने का शासनादेश जारी किया गया है। उन्होंने भी ऑक्सीमीटर, आक्सीजन प्लांट समेत अन्य उपकरण खरीदने के लिए एक करोड़ की धनराशि अवमुक्त करने का सहमति पत्र मुख्य विकास अधिकारी को दे दिया है।


उनकी विधायक निधि से 643 ऑक्सीमीटर खरीदे गए हैं। उन्होंने बताया कि 25 मई को हवालबाग में आशा कार्यकर्ताओं को सौ ऑक्सीमीटर वितरित भी कर चुके हैं। परंतु ये ऑक्सीमीटर ब्रांडेड कंपनी के बजाय चीनी कंपनी से क्रय किए गए हैं, जिनके खराब होने और एक्टीवेट नहीं होने की शिकायत आई है, जिससे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होने के साथ ही सरकार और प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।विधायकों के ऊपर भी दोषारोपण हो रहे हैं।


इस घटना से उनकी भी व्यक्तिगत छवि धूमिल हो रही है। यह जनता के साथ भी धोखा है। विस उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए हैं कि सप्लाई करने वाली कंपनी को ऑक्सीमीटर तत्काल वापस किए जाएं और कंपनी को विधायक निधि से भुगतान नहीं किया जाए। साथ ही कंपनी के खिलाफ कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाए। भविष्य में जो भी उपकरण खरीदे जाएं वे ब्रांडेड कंपनी से खरीदे जाएं, तभी विधायक निधि से भुगतान किया जाएगा।


ऑक्सीजन जेनरेटर कंसंट्रेटर भी ब्रांडेड कंपनी से क्रय किए जाएं, जिनका प्रमाण हो। क्योंकि वर्तमान में सभी उपकरणों में जीएसटी काफी कम है और रेट भी कम हुए हैं। उन्होंने कहा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी उन्होंने 1.15 करोड़ रुपये की धनराशि विधायक निधि से दी थी। पर इस धनराशि से क्या खरीद हुई उसका विवरण भी उन्हें अब तक नहीं दिया गया है। उन्होंने डीएम से खरीद का विवरण भी उपलब्ध कराने के लिए कहा है। 

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