Coronavirus in Uttarakhand: 27 नए संक्रमित मिले, मरीजों की संख्या 97 हजार पार 

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमित मामलों के साथ मरीजों की मौत के मामले थमे हैं। सोमवार को 24 घंटे के भीतर प्रदेश में किसी भी कोरोना संक्रमित मरीज की मौत न

कोरोना वायरस की जांच - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरोना वायरस की जांच - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

 उत्तराखंड में कोरोना संक्रमित मामलों के साथ मरीजों की मौत के मामले थमे हैं। सोमवार को 24 घंटे के भीतर प्रदेश में किसी भी कोरोना संक्रमित मरीज की मौत नहीं हुई। वहीं, 27 नए संक्रमित मरीज सामने आए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या 97 हजार पार पहुंच गई है। 

स्वास्थ्य वमिभाग के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को 10689 सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि पांच जिलों में 27 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। हरिद्वार में 16, देहरादून में छह, ऊधमसिंह नगर में तीन, टिहरी में एक, नैनीताल जिले में एक संक्रमित मिला है। 

प्रदेश में अब तक 1692 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वहीं, कुल संक्रमितों की संख्या 97019 हो गई है। इसमें 93479 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं, 26 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। वर्तमान में 447 सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है। 

45 से 60 वर्ष की आयु के लोगों का वैक्सीनेशन हुआ

कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए अब वैक्सीन लगवाने के लिए बुजुर्गों की बारी आ गई है। उत्तराखंड में आज सोमवार से 45 से 60 आयु के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। चयनित बूथों पर वैक्सीन लगाई जा रही है। फिलहाल केवल सरकारी अस्पतालों में वैक्सीनेशन किया जा रहा है।


राजधानी देहरादून में दून अस्पताल में वैक्सीनेशन किया जा रहा है। बता दें कि 60 साल से ऊपर के लोगों को केवल पहचान पत्र लाना है। उन्हें किसी बीमारी का प्रमाण पत्र लाने की जरूरत नहीं है। जबकि 45 से 60 साल वाले लोगों को बीमारी का प्रमाण पत्र लाना जरूरी है।

हरिद्वार में बुजुर्ग बोले-पीएम ने किया प्रेरित, हम भी टीकाकरण को तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कोविड से बचाव का टीका लगवाकर तीसरे चरण के टीकाकरण अभियान की शुरूआत की। इससे आम लोगों में टीके प्रति विश्वास बढ़ा था और संकोच की अंतिम कड़ी भी टूट गई। धर्मनगरी के बुजुर्गों का कहना है कि प्रधानमंत्री के टीका लगवाने से देशभर में बड़ा संदेश गया है। अब वे भी निसंकोच टीका लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। 


यह बड़ी खुशी की बात है कि अब बुजुर्गों और गंभीर बीमारों को भी टीका लगाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने स्वयं सबसे पहले टीका लगवाकर देश को बड़ा संदेश दिया है। अपनी बारी आने पर अब टीका लगवाने में कोई संदेह नहीं रहा है।

-बृजभूषण विद्यार्थी 


मन में अब कोविड टीके को लेकर कोई भी संकोच नहीं बचा है। जब प्रधानमंत्री ने स्वयं टीका लगवा लिया है तो निश्चित तौर पर टीका पूरी तरह सुरक्षित है। निर्धारित दिन पर टीका लगाने केंद्र पर अवश्य जाऊंगा।  

-मदन मोहन बंसल


केंद्र सरकार ने बुजुर्गों और गंभीर बीमारों के कोविड टीकाकरण का बढ़िया निर्णय लिया है। इससे अच्छी बात यह बात है कि प्रधानमंत्री टीकाकरण के लिए पहले स्वयं आगे आए। मैं भी टीकाकरण के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। 

-श्यामसुंदर सचदेवा


पहले लग रहा था कि आम आदमी तक टीका पहुंचने में काफी समय लग जाएगा। पर टीकाकरण अभियान बड़ी तेजी के साथ चल रहा है। अब जब प्रधानमंत्री ने टीका लगा लिया है तो हम भी तैयार हैं।

- सुरेश चौधरी

सर्वर डाउन होने से टीकाकरण के लिए भटके फ्रंटलाइन वर्कर

हरिद्वार में ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में सोमवार को सर्वर डाउन होने से कोविन पोर्टल ने काम करना बंद कर दिया। इससे कई फ्रंटलाइन लाइन वर्करों का सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक भी पंजीकरण नहीं हो पाया। इसके चलते कई फ्रंटलाइनकर्मी टीका नहीं लगवा पाए।


बता दें, प्रशासन ने सभी फ्रंटलाइन वर्करों को सोमवार को टीकाकरण का अंतिम मौका दिया था। साथ ही टीकाकरण न कराने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को स्पष्टीकरण देने के लिए केंद्र में ही बुलाया गया था। पहले कोविन पोर्टल के काम न करने के चलते ऑफलाइन पंजीकरण किया गया, लेकिन बाद में पोर्टल शुुरू होने के बाद ऑनलाइन पंजीकरण शुरू कर दिए गए, लेकिन सर्वर डाउन होने की समस्या से घंटों के इंतजार के बाद भी फ्रंटलाइन वर्करों का टीकाकरण नहीं हो पाया।


इस दौरान कई फ्रंटलाइन कर्मियों ने अव्यवस्थाओं को लेकर कड़ा रोष भी व्यक्त किया। भीड़ के चलते केंद्र में फिजिकल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था भी चरमरा गई। हालांकि बाद में पंजीकरण शुरू होने पर टीकाकरण हुआ। शाम तक केंद्र में एक हजार फ्रंटलाइनकर्मियों को टीकाकरण हो गया था। हालांकि कई लोगों का टीकाकरण भी नहीं हो पाया।

प्रशासन का आदेश बना असमंजस का कारण

स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण के लिए जिलेभर में 15 केंद्र खोले थे, लेकिन प्रशासन ने टीकाकरण और स्पष्टीकरण के लिए फ्रंटलाइन वर्करों को ऋषिकुल आयुर्वेदिक अस्पताल आने का आदेश किया था। इसी आदेश के चलते फ्रंटलाइन वर्करों में असमंजस की स्थिति पैदा हुई और रुड़की, लक्सर, रोशनाबाद से बड़ी संख्या में फ्रटलाइन वर्कर ऋषिकुल आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंच गए। इससे अव्यवस्था की स्थिति रही। 


टीकाकरण के लिए 15 केेंद्र खोले गए थे, लेकिन जिलेभर से अधिकांश लोग ऋषिकुल आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंच गए। पोर्टल में भी समस्या आ रही थी। इसके बावजूद एक हजार फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लगाया गया। शेष फ्रंटलाइन वर्करों को मंगलवार को टीका लगाया जाएगा।

-अजय कुमार, एसीएमओ, हरिद्वार

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