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अधिक ऊंचाई पर भी लगा सकेंगे पोर्टेबल पॉलीहाउस

विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा द्वारा विकसित वीएल पोर्टेबल पॉलीहाउस।
विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा द्वारा विकसित वीएल पोर्टेबल पॉलीहाउस। 

 अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्र के अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में पॉलीहाउस लगाने में अब किसानों को परेशानी नहीं होगी। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने गहन शोध के बाद छोटे आकार और कम लागत वाला ‘वीएल पोर्टेबल पॉलीहाउस’ विकसित किया है, जिसकी कीमत 80 हजार रुपये है।


पोर्टेबल पॉलीहाउस तीन टुकड़ों का बना है। ये टुकड़े एक-दूसरे से सटे होते हैं। ये पॉलीथिन के एकल टुकड़े से ढके हैं। इस पॉलीहाउस को जरूरत के अनुसार आसानी से एक खेत से दूसरे खेत में स्थानांतरित किया जा सकता है। प्रचलित स्थायी पॉलीहाउस में लगातार चार से पांच वर्षों तक खेती करने के बाद मिट्टी की सेहत खराब होने से कीट-पतंगों और मृदा जनित बीमारियों में वृद्धि होती है। इसके चलते उत्पादकता में कमी आती है और खेती की लागत बढ़ जाती है।


ऐसी स्थितियों में या तो किसान को मिट्टी बदलनी पड़ती है या स्थायी पॉलीहाउस को नए खेत में ले जाना पड़ता है। यह बहुत महंगा होने के साथ काफी थकाऊ होता है। इसके अलावा ऊंची पहाड़ियों (समुद्र तल से 1250 मीटर से अधिक ऊंचाई) में बड़े आकार के खेत आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। यदि होते हैं तो वे चौड़ाई में पतले (दो से पांच मीटर) ही होते हैं। लंबाई में सीधे नहीं होते। दो या दो से अधिक छोटे खेतों को मिलाकर एक खेत बनाने में न केवल अत्यधिक मिट्टी कटाई का कार्य करना पड़ता है, बल्कि लागत को भी बढ़ाता है।

अर्द्धवृत्ताकार है पॉलीहाउस का डिजाइन

अल्मोड़ा। पॉलीहाउस का डिजाइन अर्धवृत्ताकार (क्योसेंट) है। क्षेत्रफल 62.4 वर्ग मीटर (आयाम 12 मीटर लंबाई और 5.2 मीटर चौड़ाई, 2.6 मीटर ऊंचाई और एक मीटर का स्पैन) है। इसका निर्माण नट-बोल्ट और वेल्डिंग से किया गया है। इसमें प्राकृतिक वायु-संचार (वेंटिलेशन) है। वर्षा जल और ओस को संग्रहण करने का प्रावधान है। इसका उपयोग बहुउद्देशीय है। इसका उपयोग सब्जी उगाने, अत्यधिक सर्दी में मछली के तालाबों को ढकने आदि में कर सकते हैं।

तीन वैज्ञानिकों ने बनाया पोर्टेबल पॉलीहाउस

अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि वैज्ञानिक डॉ. शेर सिंह, डॉ. श्याम नाथ, इंजीनियर डॉ. जितेंद्र कुमार ने गहन शोध और कड़े परिश्रम के बाद डेढ़ साल में ‘वीएल पोर्टेबल पॉलीहाउस’ विकसित किया है। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्र के लिए यह पोर्टेबल पॉलीहाउस वरदान साबित होगा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और ऐरोटेक इंजीनियरिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड चल्ताबैरिआ जिला उत्तर-24, परगनास पश्चिम बंगाल के साथ ‘वीएल पोर्टेबल पॉलीहाउस’ के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर वीपीकेेएएस के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत और कंपनी के हबीबउल्ला ने हस्ताक्षर किए हैं।

‘वीएल पोर्टेबल पॉलीहाउस’ काफी सुविधाजनक है। इसका प्रयोग कृषि क्षेत्र में पॉलीहाउस क्रांति लाएगा। किसान पोर्टेबल पॉलीहाउस की डिमांग कंपनी को दे सकता है। साथ ही हमारे संस्थान को बता सकता है। हम कंपनी को इस बारे में सूचित कर देंगे।

-डॉ. लक्ष्मीकांत, निदेशक विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा

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