हरिद्वार महाकुंभ  2021 : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र आज हरिद्वार में, कुंभ कार्यों का करेंगे निरीक्षण

 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत 
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बुधवार को हरिद्वार में रहेंगे। मुख्यमंत्री के वरिष्ठ प्रमुख निजी सचिव केके मदान के मुताबिक, मुख्यमंत्री गुरुकुल कांगड़ी हेलीपैड पर उतरेंगे।


यह भी पढ़ें... महाकुंभ 2021: आज शाही अंदाज में निकलेगी निरंजनी अखाड़े की पेशवाई, हेलीकॉप्टर से होगी फूलों की बारिश



वहां से महाकुंभ के लिए निर्मित मीडिया सेंटर और 150 बेड के अस्थायी अस्पताल का निरीक्षण करेंगे। दोपहर तीन बजे गुरुकुल कांगड़ी हेलीपैड से भराड़ीसैंण के लिए निकलेंगे।

150 बेड का बेस अस्पताल तैयार


सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत आज पावन धाम के पास बनाए गए 150 बेड के अस्थायी बेस अस्पताल और कुंभ मीडिया सेंटर का निरीक्षण करेंगे। सीएम के दौरे से पहले मंगलवार को मेलाधिकारी स्वास्थ्य डॉ. अर्जुन सिंह सेंगर ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। 

मेलाधिकारी स्वास्थ्य अर्जुन कुमार सेंगर ने पावन धाम स्थित अस्थायी बेस अस्पताल और ऋषिकेश का दौरा किया। अस्थाई बेस अस्पताल की सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गई। इसके बाद मेलाधिकारी रायवाला, नेपाली फार्म, ऋषिकेश, श्यामपुर, लक्ष्मण झूला, नीलकंठ आदि क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।

उन्होंने अधिकारियों को चिह्नित स्थानों पर जल्द से जल्द अस्थायी अस्पतालों के निर्माण के निर्देश दिए। इसके साथ उन्होंने 10 बेड का अस्थायी अस्पताल को भी देखा। निरीक्षण के दौरान अपर मेलाधिकारी स्वास्थ्य डॉ. संजय जैन, डॉ. विनीत त्यागी, डॉ. रामप्रकाश, निर्दोष सैनी आदि उपस्थित रहे।
कुंभ में होंगे मांगल गीत और जागर : मुख्यमंत्री
केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से केदारघाटी के विलुप्त होते पौराणिक मांगल गीतों और कुंभ के जागरों के संरक्षण की मांग रखी है। इस पर मुख्यमंत्री ने हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान केदारघाटी के मांगल गीतों व जागर कार्यक्रम कराने का आश्वासन दिया है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत केदारनाथ विधायक के घर गोपेश्वर पहुंचे। इस दौरान हुई चर्चा में विधायक मनोज रावत ने कहा कि भराड़ीसैंण (गैरसैंण) विधानसभा में राज्यपाल के सम्मुख केदारघाटी की महिलाओं की ओर से मांगल गीतों व कुंभ जागरों की प्रस्तुति देनी थी, लेकिन पिताजी के निधन के कारण तीन दिन का शोक होने से यह कार्यक्रम नहीं किया जा सका है।
 
उन्होंने कहा कि केदारघाटी के पौराणिक जागर आज भी प्रासंगिक हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के वाशिंदों की बोली भाषा में मधुरता है। यहां के मांगल गीत और जागर मन को मोह लेते हैं। कुंभ के आयोजन के दौरान मांगल गीतों और जागरों के कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएंगे।