SSC Exams Chaos: कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में अराजकता, लाखों छात्रों का भविष्य अधर में

Mandeep Singh Sajwan
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के भवन के सामने परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ SSC उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन, नई दिल्ली, भारत।

नई दिल्ली: देश भर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाएं एक सुनहरा अवसर होती हैं। हालांकि, 24 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच आयोजित "SSC Selection Post Phase 13" की परीक्षाओं में अभूतपूर्व अराजकता ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तकनीकी गड़बड़ियों, प्रशासनिक विफलताओं और वेंडर विवाद ने छात्रों के बीच बड़े पैमाने पर आक्रोश पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

SSC में आखिर क्या हुआ कि अराजकता फैल गई ❓

1. व्यापक तकनीकी गड़बड़ियां और परीक्षा रद्द होना

24 जुलाई से शुरू हुई SSC Selection Post Phase 13 की भर्ती परीक्षाओं में कई केंद्रों पर बड़े पैमाने पर व्यवधान देखा गया।

कई परीक्षा केंद्रों पर, जैसे कि पवन गंगा एजुकेशनल सेंटर 2 और कर्नाटक के हुबली में एडुकेसा इंटरनेशनल, तकनीकी खराबी और "प्रशासनिक कारणों" का हवाला देते हुए बिना किसी पूर्व सूचना के परीक्षाएं अचानक रद्द कर दी गईं।

दूर-दराज से आए छात्रों को इस अचानक रद्द होने की जानकारी तब मिली जब वे केंद्र पर पहुंच चुके थे, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से भारी परेशानी उठानी पड़ी।


2. प्रशासनिक और लॉजिस्टिक विफलताएं

छात्रों ने परीक्षा केंद्रों पर खराब सुविधाओं, गैर-कार्यशील कंप्यूटरों और अव्यवस्थित प्रबंधन की शिकायतें कीं।

कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई और केंद्रों के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।

कुछ छात्रों ने यह भी शिकायत की कि उनके परीक्षा केंद्र उनके गृह नगर से सैकड़ों किलोमीटर दूर आवंटित किए गए थे, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।


3. वेंडर विवाद और जवाबदेही पर सवाल

इस पूरे विवाद के केंद्र में SSC का अपने पुराने वेंडर TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) से अलग होकर एक नई, विकेन्द्रीकृत प्रणाली को अपनाने का निर्णय रहा है।

कुछ शिक्षाविदों और यहां तक कि एक परीक्षा केंद्र के प्रमुख ने भी आरोप लगाया कि TCS ने अनुबंध खोने के बाद परीक्षा प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की। हालांकि, TCS ने इन आरोपों को "निराधार और अनुमान आधारित" बताकर दृढ़ता से खारिज कर दिया है।

इस मामले ने सरकार को जांच शुरू करने के लिए मजबूर कर दिया है ताकि नए वेंडर के प्रदर्शन और पुराने वेंडर पर लगे आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।


आंदोलन और छात्रों की मांगें

इस अराजकता के विरोध में, सोशल मीडिया पर #SSCMismanagement और #SSCVendorFailure जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। 31 जुलाई, 2025 को, "दिल्ली चलो" मार्च के तहत हजारों छात्र और शिक्षक जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए। शांतिपूर्ण विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा जबरन हटाया गया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिससे जन आक्रोश और बढ़ गया।


छात्रों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. आउटसोर्स किए गए वेंडर सिस्टम को खत्म कर SSC एक पारदर्शी और विश्वसनीय इन-हाउस परीक्षा प्रणाली विकसित करे।
  2. प्रभावित उम्मीदवारों को मुआवजा दिया जाए या उनकी दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए।
  3. परीक्षा रद्द होने और पुनर्निर्धारण के बारे में तत्काल और स्पष्ट जानकारी दी जाए।
  4. कथित तोड़फोड़ की जांच कर दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए।

आधिकारिक प्रतिक्रिया

SSC ने कुछ परीक्षा रद्द होने और पुनर्निर्धारण की पुष्टि करते हुए नोटिस जारी किए हैं, लेकिन गड़बड़ियों के मूल कारणों और विरोध प्रदर्शनों पर आयोग की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है, जिसमें नए और पुराने दोनों वेंडरों की भूमिका की जांच की जा रही है।

आगामी प्रमुख परीक्षाओं, जैसे कि SSC CGL, CHSL, और MTS के परीक्षा कैलेंडर की भी समीक्षा की जा रही है, जिससे लाखों और उम्मीदवारों का भविष्य अनिश्चितता में है।


क्या अधर में लटक गया लाखों युवाओं का भविष्य?

जुलाई-अगस्त 2025 की इन घटनाओं ने भारत में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं के प्रबंधन में गंभीर कमियों को उजागर किया है। वेंडर की जवाबदेही से लेकर तकनीकी बुनियादी ढांचे और सरकारी निगरानी तक, हर स्तर पर सुधार की आवश्यकता है। यह संकट एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जो डिजिटल युग में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन के तरीके पर पुनर्विचार करने की मांग करता है। जब तक कोई व्यापक समाधान नहीं निकलता, लाखों उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

(This is a developing story, further updates are awaited)

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