हरिद्वार में वन भूमि खुर्द बुर्द करने के आरोपी पूर्व रेंजर 20 साल बाद गिरफ्तार 


 हरिद्वार के देवपुरा में वन विभाग की पांच सौ बीघा जमीन खुर्द बुर्द करने के आरोप में सीबीसीआईडी ने यूपी के रिटायर रेंजर को गिरफ्तार किया है। यह मामला राज्य गठन के कुछ ही समय बाद अप्रैल 2001 में सामने आया था।


हरिद्वार के तत्कालीन तहसीलदार जयपाल सिंह ने अप्रैल 2001 में ज्वालापुर कोतवाली में वन विभाग की पांच सौ बीघा जमीन खुर्द बुर्द किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। पहले मामले की जांच स्थानीय पुलिस करती रही, बाद में प्रकरण सीबीसीआईडी को भेज दिय गया। इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें से अंतिम आरोपी तत्काली रेंजर आरपी गुप्ता को सीबीसीआईडी टीम ने अब यूपी के लखीमपुर खीरी में गिरफ्तार कर लिया है।


आरोपियों ने तब भू माफिया के साथ मिलीभगत कर करीब पांच सौ बीघा जमीन को आबादी में दर्ज कर दिया था, इसके लिए वन विभाग के दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर नॉन जेडए की जमीन को आबादी में दर्ज किया गया। आरोपियों ने जमीन पर कब्जा लेने में भी भू माफिया की मदद की। हालांकि बाद में मामला सुर्खियों में आने पर वन विभाग ने कब्जा वापस ले लिया था।


सात साल परमिशन में बीते 20 बाद हुई गिरफ्तारी

हरिद्वार के देवपुरा जैसी अहम लोकेशन पर बेशकीमती पांच सौ बीघा जमीन खुर्द बुर्द करने के आरोपी रेंजर बीस साल बाद कानून एजेंसियों के हत्थे चढ़ पाए। बीस साल बाद भी जांच एजेंसियों इस मामले में कुल 11 आरोपियों से चार अब इस दुनिया में नहीं हैं।   

सीबीसीआईडी के मुताबिक जमीन कब्जाने का खेल 1995 में शुरू हुआ जो राज्य बनने के साल 2000 तक जारी रहा। इस दौरान हरिद्वार में तैनात रहे वन अधिकारियों की शह पर, भू माफिया ने देवपुरा में वन भूमि कब्जाने का खेल शुरू किया, वन अधिकारियों ने ना सिर्फ इसके लिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़ किया बल्कि आरोपियों को बिना किसी बाधा के कब्जा भी लेने दिया।


राज्य बनने के बाद इसमें स्थानीय प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया। तब के ज्यादातर वन अधिकारी यूपी विकल्प धारी थे, इस कारण अलग राज्य बनने के बाद वो उत्तराखंड की जांच एजेंसियों के चंगुल से दूर होते चले गए। यही कारण है कि बीस साल के बाद इस मामले में अब तक सात आरोपियों की ही गिरफ्तारी हो पाई। जबकि चार अन्य की अब मौत भी हो चुकी है। प्रकरण में एक डीएफओ भी आरोपी थे, कोर्ट से उनकी गिरफ्तारी के आदेश भी हो चुके थे, लेकिन इस बीच उनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। मामला अभी हरिद्वार के एसीजेएम कोर्ट में चल रहा है। 



सात साल बाद मिली अनुमति 

इस मामले में सीबीसीआईडी ने साल 2014 में यूपी सरकार से आरोपी रेंजर की गिरफ्तारी की अनुमति मांगी थी। अब सात साल बाद अनुमति मिलने पर जांच दल ने आरोपी रेंजर आरपी गुप्ता को कुम्हारण टोला, गोला गोकरण लखीमपुर खीरी यूपी से गिरफ्तार कर लिया है। 67 वर्षीय गुप्ता यूपी से ही रिटायर होकर लखीमपुर खीरी में रह रहे थे। टीम में इंस्पेक्टर राकेश कुमार, कांस्टेबल रामकिशोर, हरमिंदर सिंह, विनोद शामिल थे। 

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