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हरिद्वार: गंगा में डूब रही गाजियाबाद की महिला के लिए देवदूत बने पुलिसकर्मी, सुरक्षित निकाला बाहर

 

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

हरिद्वार में गंगा में डूब रही महिला की जान पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी और सतर्कता से बच गई। पेट में पानी भरने के कारण उसे उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। महिला के परिजनों ने पुलिसकर्मियों को की प्रशंसा की। 



टिहरी गढ़वाल के थाना लंबगांव के उप निरीक्षक विनोद कुमार की तैनाती कुंभ मेला ड्यूटी में है। रविवार रात उप निरीक्षक विनोद कुमार अपने हमराही पंकज व स्थानीय गोताखोर पवन के साथ फट्टापुल (हरकी पैड़ी) पर ड्यूटी कर रहे थे। रात 7:45 बजे के विनोद कुमार को चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।


आवाज सुनते ही वह उस तरफ गए तो देखा कि जेड महिला डूब रही है। जिस पर उन्होंने तुरंत ही अपने हमराह व गोताखोर के साथ गंगा में छलांग लगा दी और न्यू संजय पुल के पास महिला को बचा कर बाहर लाए। इसके बाद उच्चाधिकारियों को सूचना देने के साथ ही महिला को सरकारी एंबुलेंस से जीडी अस्पताल में भिजवाया। करीब दो घंटे बाद महिला को होश आया।


महिला ने अपना नाम लीलावती निवासी राजेंद्र नगर सेक्टर दो गाजियाबाद बताया। महिला के अनुसार सीढ़ियों पर बैठने के दौरान संतुलन बिगड़ने से वह गंगा में गिर गई थी। इसके बाद महिला के भाई को जानकारी दी गई। आईजी मेला संजय गुंज्याल ने बताया कि पुलिसकर्मियों का काम काबिले तारीफ है। 

दीपू-दीपक अब तक बचा चुके हैं कई लोगों की जान 

हरकी पैड़ी एवं आसपास घाटों पर गंगा की सफाई कर आजीविका चलाने वाले दीपू और दीपक गंगा में डूबते लोगों के लिए संकटमोचक साबित होते हैं। दोनों सगे भाई कुशल तैराक हैं और हरकी पैड़ी एवं आसपास घाटों पर कई लोगों की जान बचा चुके हैं। महाकुंभ में मदद के लिए दोनों भाई हमेशा तैयार रहते हैं। 


उत्तर हरिद्वार निवासी दीपू और दीपक हरकी पैड़ी एवं आसपास घाटों पर विसर्जित होने वाले सिक्के और बर्तनों को निकालकर गंगा की सफाई करने में भूमिका निभाते हैं। इसी से उनकी आजीविका भी चलती है। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद सिक्के और अन्य धातु चढ़ाते हैं।


कर्मकांडों में कई श्रद्धालुओं की ओर से कपड़े एवं पूजन सामग्री बहाई जाती है। अस्थि विर्सजन में भी सोने और चांदी के कण होते हैं। दोनों भाई गंगा में डुबकी लगाकर गंगा में विसर्जित होने वाली हर सामग्री बाहर निकालते हैं।


अपने काम की चीजों को समेट लेते हैं और बेकार सामग्री को डस्टबिन तक पहुंचाते हैं। मेला प्रशासन ने इनको परिचय पत्र भी दिए हैं। दीपू और दीपक बेहतरीन तैराक हैं। तेज पानी के बहाव की चपेट में आने से स्नान के दौरान कई श्रद्धालु बह जाते हैं। दीपू और दीपक गंगा में छलांग लगाकर श्रद्धालुओं को बचा लेते हैं। 

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