एक्सक्लूसिव: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में शुरू होगा डेवलपमेंटल स्टडीज कोर्स

छात्र नए सत्र से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से विकासात्मक अध्ययन (एमए इन डेवलपमेंटल स्टडीज कोर्स) की पढ़ाई कर सकेंगे।

 

प्रतीकात्मक
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छात्र नए सत्र से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से विकासात्मक अध्ययन (एमए इन डेवलपमेंटल स्टडीज कोर्स) की पढ़ाई कर सकेंगे। विषय विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय कमेटी ने पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए हरी झंडी दे दी है। इस पाठ्यक्रम की फीस क्या होगी, इसका निर्धारण बोर्ड ऑफ स्टडीज की ओर से किया जाएगा।   



उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में वर्तमान में 100 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। शहरी एवं ग्रामीण विकास पर अध्ययन करने के मकसद से काफी समय से एमए इन डेवलपमेंटल स्टडीज कोर्स को शुरू करने की उठ रही थी। विवि ने इस संबंध में विषय विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कृषि एवं विकास अध्ययन विद्या शाखा के कार्यकारी निदेशक प्रो. पीडी पंत ने बताया कि मंगलवार को विषय विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय कमेटी की बैठक हुई, जिसमें इस पाठ्यक्रम को चलाने की संस्तुति कर दी गई।



कमेटी में प्रो. प्रदीप, प्रो. एमसी जोशी, प्रो. पीके मोमिता शामिल रहे। उन्होंने बताया कि अब इस पाठ्यक्रम का प्रस्ताव बोर्ड ऑफ स्टडीज में रखा जाएगा, जिसमें फीस का निर्धारण होगा। उन्होंने बताया कि इसमें डिप्लोमा कोर्स एक वर्षीय, सर्टिफिकेट कोर्स छह महीने का और डिग्री कोर्स दो वर्षीय होगा। यह पाठ्यक्रम भी सेमेस्टर प्रणाली के आधार पर चलेगा।  


माली ट्रेनिंग के लिए सर्टिफिकेट कोर्स भी इसी सत्र से 

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय नये सत्र से माली ट्रेनिंग के लिए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने जा रहा है। यह कोर्स 12 वीं पास कोई भी व्यक्ति कर सकेगा। इसके लिए विवि में नर्सरी विकसित की जाएगी। प्रशिक्षित युवा मुक्त विवि के सर्टिफिकेट के आधार  माली के पद के लिए आवेदन भी कर सकेंगे। इस कोर्स की अवधि और फीस क्या होगी, इसका निर्धारण करने की प्रक्रिया चल रही है। 


विश्वविद्यालय की कोशिश है कि नए सत्र से रोजगारपरक कोर्स प्रारंभ किए जाएं। इसी के अंतर्गत एमए इन डेवलपमेंटल स्टडीज कोर्स शुरू किया जा रहा है। कौशल विकास की दृष्टि से भी कम अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स तैयार किए जा रहे हैं ताकि विश्वविद्यालय से सर्टिफिकेट कोर्स करने के बाद भविष्य में कहीं भी नौकरी के लिए आवेदन करने में मदद मिल सके। 

- प्रो. ओपीएस नेगी कुलपति, यूओयू

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