उत्तराखंड: राजभवन से अभी नहीं लौटा राज्य विवि विधेयक, आठ महीने पहले विधानसभा में हुआ था पारित


 उत्तराखंड में राज्य विश्वविद्यालयों को एक एक्ट से संचालित करने की प्रदेश सरकार की कोशिशें अभी अधूरी हैं। करीब आठ महीने पहले विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक (अंब्रैला विधेयक) को सदन से पारित कराकर विधायी विभाग के माध्यम से राजभवन को भेजा था, लेकिन अभी तक राजभवन से यह विधेयक वापस नहीं लौटा है। विधानसभा और विधायी विभाग के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। अपर मुख्य सचिव (उच्च शिक्षा) आनंद बर्द्धन का भी कहना है कि अभी विधेयक विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है।


इससे पहले भी यही विधेयक राजभवन में लंबे समय तक विचाराधीन रहा। इसके बाद सितंबर में विधानसभा सत्र से ठीक दो दिन पहले राजभवन ने कुछ आपत्तियों के साथ विधेयक को लौटा दिया था। राजभवन के इस रुख से असहज सरकार ने 24 सितंबर 2020 को विधेयक में कुछ संशोधन कर सदन से उसे पारित कराया। यह बिल राज्यपाल की मंजूरी के लिए पुन: राजभवन भेजा गया, लेकिन अभी तक नहीं लौटा है। सचिव राज्यपाल बीके संत ने बताया कि वह अवकाश से अभी लौटे हैं और विधेयक के बारे में जानकारी उपलब्ध करा देंगे। 


गैरसैंण सत्र में पारित विधेयकों के भी लौटने का इंतजार

सूत्रों के मुताबिक, गैरसैंण विधानसभा में पारित विधेयकों में से भी अभी वित्त विनियोग विधेयक व पंचायतीराज से संबंधित विधेयक ही राजभवन से लौटे हैं। शेष विधेयकों का राजभवन से लौटने का इंतजार है। 
ये हैं राजभवन की आपत्तियां
- विधेयक के प्रावधानों को राजकीय विश्वविद्यालयों की स्वायतत्ता के विपरीत महसूस किया था।
- कुलपति के चयन में कुलाधिपति (राज्यपाल) के अधिकारों को कमतर करने पर भी प्रश्न किए थे। 
- विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम करने का सुझाव दिया था। 

सरकार की उम्मीदों को लगा था झटका

प्रदेश सरकार यह मान कर चल रही थी कि अन्य विधेयकों की तरह राज्य विश्वविद्यालय विधेयक भी राजभवन से सहज मंजूरी के साथ लौट आएगा, लेकिन राजभवन ने कतिपय आपत्तियों के साथ विधेयक को पुनर्विचार के राज्य सरकार को भेजा। सरकार के लिए यह किसी झटके से कम नहीं था।



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