जूना अखाड़े की पहल : महामंडलेश्वरों की ‘पुकार’ राशि सामाजिक कार्यों में होगी खर्च 

जूना अखाड़ा देगा दोगुनी रकम अनुसूचित जाति के संतों के लिए दरवाजे खोलने के बाद जूना अखाड़े की अनूठी पहल

जूना अखाड़ा
जूना अखाड़ा

 अनुसूचित जाति के संतों के लिए दरवाजे खोलने के बाद जूना अखाड़ा सामाजिक कार्यों में भागीदारी की अनूठी पहल करने जा रहा है। महामंडलेश्वरों के पट्टाभिषेक रस्म में पुकार की धनराशि पहली बार अखाड़े की व्यवस्था संचालन के बजाय उनके क्षेत्र के ही अति पिछड़े इलाकों में जन सुविधाओं के विकास पर खर्च होगी। अखाड़ा अपनी ओर से भी पुकार राशि से दोगुनी रकम महामंडलेश्वरों को देगा ताकि पिछड़े क्षेत्रों में स्कूल और अस्पताल बनाए जा सकें।



जूना अखाड़ा साधु-संतों और नागा संन्यासियों का सबसे बड़ा परिवार है। दुनियाभर के संत अखाड़े से जुड़े हैं। हर कुंभ में अखाड़ा नए महामंडलेश्वरों की ताजपोशी करता है। पट्टा अभिषेक के दौरान पुकार की रस्म होती है।



इसमें अखाड़े की ओर से पुकार की धनराशि सुनिश्चित की जाती है। महामंडलेश्वर की पदवी संभालने वाले संतों को पुकार की धनराशि 12 साल की अवधि में अखाड़े को देनी होती है। इसी से अखाड़े की व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। 


महामंडलेश्वर जूना अखाड़े की उज्जैन, नासिक, प्रयागराज, काशी और हरिद्वार स्थित संपत्ति में किसी भी जगह अपने लिए कमरे बनवाते थे। जूना अखाड़े में बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि की मौजूदगी में उनके चार शिष्यों को आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने महामंडलेश्वर का पट्टा अभिषेक कराया।


समारोह में हर महामंडलेश्वर की 11-11 लाख रुपये की पुकार लगी जबकि मंत्राभिषेक करने वाले आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि की 55 लाख रुपये की पुकार लगी। अब श्रीमहंत हरि गिरि ने पुकार की धनराशि को सामाजिक कार्यों में खर्च करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा अपनी व्यवस्थाओं के संचालन में सक्षम है। पुकार धनराशि की जरूरत अति पिछड़े इलाकों के जन सुविधाओं के विकास के लिए है। उनकी इस पहल का संतों ने स्वागत भी किया। 


महामंडलेश्वर अपने क्षेत्र के पिछड़े इलाकों में पुकार राशि से स्कूल, कॉलेज, वृद्धाश्रम, दिव्यांग आश्रम बना सकते हैं। इसके लिए अखाड़ा अपनी ओर से पुकार से दोगुनी राशि भी देगा। स्कूल, कॉलेज निर्माण के लिए निशुल्क भूमि की उपलब्धता के लिए भी सरकार से वार्ता करेगा।

- श्रीमहंत हरि गिरि

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